नई दिल्ली।(राष्ट्र की परम्परा डेस्क)शुक्रवार को राष्ट्रपति भवन में एक ऐतिहासिक पल दर्ज हुआ, जब अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से लौटने वाले पहले भारतीय ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। राष्ट्रपति ने उन्हें इस उपलब्धि के लिए शुभकामनाएँ दीं और भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के नए आयाम की ओर इसे एक बड़ी छलांग करार दिया।

इस अवसर पर ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालकृष्णन नायर, ग्रुप कैप्टन पुण्यश्लोक बिस्वाल, इसरो के अध्यक्ष और अंतरिक्ष विभाग के सचिव डॉ. वी. नारायणन, तथा मानव अंतरिक्ष उड़ान केंद्र के निदेशक दिनेश कुमार सिंह भी उपस्थित थे।

राष्ट्रपति मुर्मू ने पूरी टीम को आने वाले मिशनों, विशेषकर गगनयान मिशन के लिए शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम न केवल वैज्ञानिक प्रगति बल्कि राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है।

अंतरिक्ष का अनुभव साझा किए

राष्ट्रपति से भेंट के बाद ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने मीडिया से बातचीत में अंतरिक्ष में अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष में रहकर मिले ज्ञान और अनुभव भविष्य की मानव अंतरिक्ष उड़ानों के लिए बेहद उपयोगी साबित होंगे।

उन्होंने कहा कि कक्षा से पृथ्वी को देखना एक अद्वितीय अनुभव है। उन्होंने गर्व से कहा –
“भारत आज भी अंतरिक्ष से सारे जहाँ से अच्छा दिखता है।”

शुक्ला ने बताया कि यह मिशन भारत की मानव अंतरिक्ष उड़ान संबंधी महत्वाकांक्षाओं को मजबूती देगा और वैश्विक स्तर पर भारत को नई पहचान दिलाएगा।

भारत के लिए बड़ा कदम

इसरो और भारतीय वायुसेना के लिए यह मिशन एक मील का पत्थर माना जा रहा है। अंतरिक्ष यात्रियों के अनुभव और वैज्ञानिक आंकड़े भारत के आगामी गगनयान और भविष्य की गहन अंतरिक्ष यात्राओं की नींव को और मजबूत करेंगे।

भारत के अंतरिक्ष इतिहास में यह उपलब्धि आने वाले समय में नई ऊँचाइयों और संभावनाओं का रास्ता खोलती है।