
नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को वर्ष 2022 में दर्जी कन्हैया लाल की हत्या पर आधारित विवादित फिल्म “उदयपुर फाइल्स” का पुनर्मूल्यांकन करने का सख्त निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया आगामी 6 अगस्त 2025 तक पूरी की जानी चाहिए और इसमें भारत के मौजूदा कानूनी मानदंडों का पूर्णतः पालन होना चाहिए। यह आदेश तब आया जब केंद्र सरकार ने अदालत को सूचित किया कि वह उस पूर्व निर्णय को वापस लेने पर विचार कर रही है, जिसमें फिल्म को कुछ कट्स के साथ रिलीज़ की अनुमति दी गई थी। “क्या केंद्र सरकार अपने पुनरीक्षण अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत फिल्म में संपादन और कट्स का निर्देश दे सकती है?” इस संदर्भ में अदालत ने भारत के सिनेमैटोग्राफ अधिनियम का हवाला देते हुए कहा कि यह अधिनियम न केवल फिल्मों के प्रमाणन और रिलीज़ को नियंत्रित करता है, बल्कि सरकार को पुनरीक्षण और हस्तक्षेप का अधिकार भी देता है—विशेष रूप से जब फिल्म की सामग्री संवेदनशील, भड़काऊ या सार्वजनिक शांति के लिए खतरा मानी जाए। “उदयपुर फाइल्स” फिल्म 2022 में राजस्थान के उदयपुर में घटित उस दिल दहला देने वाली घटना पर आधारित है, जिसमें दर्जी कन्हैया लाल की दिनदहाड़े निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। माना जा रहा है कि फिल्म में इस घटना को जिस रूप में चित्रित किया गया है, वह सांप्रदायिक तनाव को भड़का सकता है, जिसे लेकर कई याचिकाएं अदालत में दायर की गई थीं। दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को यह भी निर्देश दिया कि वह अपने पुनरीक्षण अधिकार का प्रयोग करते समय अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सार्वजनिक हित के बीच संतुलन बनाए। कोर्ट ने कहा, “कानून का पालन करना और संवेदनशील विषयों पर आधारित फिल्मों की बारीकी से समीक्षा करना अनिवार्य है, ताकि समाज में किसी प्रकार की अशांति या वैमनस्य न फैले।” यह मामला ना सिर्फ एक फिल्म को लेकर है, बल्कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सार्वजनिक सुरक्षा और सरकारी जिम्मेदारी के बीच संतुलन को लेकर भी एक अहम मिसाल बन सकता है। अब देखना होगा कि केंद्र सरकार 6 अगस्त तक क्या कदम उठाती है और इस फिल्म के भविष्य पर क्या निर्णय होता है।