
नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) सुप्रीम कोर्ट ने समाजवादी पार्टी (एसपी) को एक बड़ा झटका देते हुए पीलीभीत में नगर निगम की संपत्ति से बेदखली को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए राजनीतिक ताकत और बाहुबल के दुरुपयोग को लेकर तीखी टिप्पणी की।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने स्पष्ट रूप से सवाल किया, “आपने परिसर पर कब्जा कैसे किया? क्या आपके पास कोई वैध दस्तावेज़ या आवंटन आदेश था?” पीठ ने कहा कि यह मामला स्पष्ट रूप से राजनीतिक प्रभाव और दबाव का परिणाम प्रतीत होता है, जिससे नगर निगम की सार्वजनिक संपत्ति पर अवैध रूप से कब्जा किया गया।
राजनीतिक दुरुपयोग पर तल्ख टिप्पणी
पीठ ने कहा कि “ऐसा प्रतीत होता है कि कार्यालय का यह आवंटन नीतिगत प्रक्रिया के बजाय राजनीतिक दखल और बाहुबल के चलते किया गया था। यह लोकतंत्र और प्रशासनिक व्यवस्था के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।” कोर्ट ने आगे कहा कि नगर निकाय की संपत्तियां जनता की होती हैं, और किसी भी राजनीतिक दल को उनका अवैध कब्जा करने का अधिकार नहीं है।
वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे से कोर्ट का सीधा सवाल
एसपी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने याचिका में दावा किया कि पार्टी लंबे समय से उस परिसर में कार्य कर रही थी, जिसे हाल ही में खाली कराने की कार्रवाई की गई। इस पर न्यायालय ने तीखे स्वर में पूछा कि जब कोई वैध आवंटन ही नहीं था, तो वहाँ कब्जा कैसे और किस अधिकार से किया गया?
नगर निगम का पक्ष
नगर निगम पीलीभीत ने दावा किया था कि संबंधित भवन सार्वजनिक उपयोग के लिए है और किसी भी राजनीतिक दल को स्थायी रूप से आवंटित नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि एसपी द्वारा परिसर पर कब्जा अवैध था और उसे हटाने की कार्रवाई नियमानुसार की गई।
अदालत का निर्णय
सुनवाई के उपरांत शीर्ष अदालत ने कहा कि वह ऐसी याचिका पर विचार करने का कोई औचित्य नहीं देखती, जिसमें राजनीतिक प्रभाव और अवैध कब्जे की झलक स्पष्ट हो। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।