नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे ने देश की राजनीति में हलचल मचा दी है। एक ओर जहां इस्तीफे की वजहों को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर इस संवैधानिक पद पर नए चेहरे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार सत्तारूढ़ एनडीए सरकार इस बार ऐसे व्यक्ति को उपराष्ट्रपति बनाना चाहती है, जो न सिर्फ अनुभवी और राजनीतिक रूप से संतुलित हो, बल्कि राज्यसभा के सभापति के रूप में भी निष्पक्षता के साथ भूमिका निभा सके।

राजनाथ सिंह – मजबूत दावेदार

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का नाम इस दौड़ में सबसे ऊपर माना जा रहा है। लंबे राजनीतिक अनुभव, संगठन में पकड़ और संसद में मजबूत उपस्थिति के चलते वे सत्ता पक्ष के लिए एक विश्वसनीय विकल्प हैं। राजनाथ सिंह अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में भी प्रशासनिक नेतृत्व दे चुके हैं। केंद्र सरकार में गृह और रक्षा जैसे अहम मंत्रालय संभाल चुके राजनाथ सिंह का नाम आते ही राजनीतिक गलियारों में एक मजबूत संदेश गया है कि सरकार इस बार अनुभवी नेतृत्व पर दांव लगा सकती है।

नीतीश कुमार – सियासी संतुलन का चेहरा

दूसरी ओर बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू के प्रमुख नीतीश कुमार का नाम भी चर्चा में है। एनडीए में वापसी के बाद नीतीश की भूमिका को केवल सीमित नहीं माना जा रहा। उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में देखा जाता है, जो कई मोर्चों पर सियासी संतुलन बना सकते हैं। उपराष्ट्रपति पद पर उनकी ताजपोशी से एनडीए को क्षेत्रीय संतुलन, पिछड़ा वर्ग प्रतिनिधित्व और विपक्षी दलों के बीच सॉफ्ट लीडरशिप का संदेश देने में मदद मिल सकती है।

राजनीतिक समीकरण साधने की कोशिश

विशेषज्ञों की मानें तो उपराष्ट्रपति पद की नियुक्ति अब केवल संवैधानिक औपचारिकता नहीं रह गई है, बल्कि यह राजनीतिक रणनीति का एक अहम हिस्सा बन चुका है। आने वाले समय में राज्यसभा में विधायी कार्यों को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए एक अनुभवी और संतुलित सभापति की आवश्यकता होगी। ऐसे में केंद्र सरकार किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती।

नतीजे की प्रतीक्षा

हालांकि, अभी तक किसी नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। लेकिन राजनीतिक गलियारों में जिस तरह से राजनाथ सिंह और नीतीश कुमार के नाम सामने आ रहे हैं, उससे स्पष्ट है कि सत्ता पक्ष इस बार उपराष्ट्रपति पद के लिए किसी बड़े चेहरे को मैदान में उतारना चाहता है।अब देखना दिलचस्प होगा कि सत्ता की रणनीति किस ओर जाती है और देश को अगला उपराष्ट्रपति कौन मिलेगा।