लखनऊ(राष्ट्र की परम्परा डेस्क)
उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में अफसरों के तरह-तरह के शौक हमेशा चर्चा में रहते हैं, लेकिन इस बार सुर्खियों में हैं एक तेज-तर्रार आईएएस मैडम, जो हाल ही में एक जिले से ट्रांसफर होकर शासन में वापस आई हैं। पहले जिस जिले में वह तैनात थीं, उसे एक केंद्रीय मंत्री का वीआईपी संसदीय क्षेत्र माना जाता है। वहां कड़क छवि और त्वरित फैसलों के लिए चर्चित रहीं मैडम की वापसी अब लखनऊ में हुई है, जहां उन्हें आयुर्वेद, यूनानी और जड़ी-बूटियों से जुड़े एक अहम विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।

पर असली दिलचस्पी तो कुछ और ही है। बताया जा रहा है कि मैडम की रुचि विभागीय कार्यों से ज्यादा अपने पुराने शौक — संगीत — में है। और इस बार उन्होंने इस शौक को पूरा करने के लिए सरकारी संसाधनों का सहारा लिया है। खबर है कि उन्होंने संगीत सीखने के लिए आवश्यक सारे वाद्य यंत्र और उपकरण विभागीय बजट से ही खरीदवा लिए।

मजेदार बात ये है कि यह महंगा सामान उनके सरकारी आवास पर डिलीवर हुआ, लेकिन पेमेंट किसी और अधिकारी के माध्यम से कराने की तैयारी की गई। अब भुगतान से जुड़ी फाइलें एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक घूम रही हैं, और अधिकारी असहज महसूस कर रहे हैं।

चर्चा तो यहां तक है कि मैडम ने बाकायदा संगीत की ऑनलाइन क्लासेज भी शुरू कर दी हैं। हालांकि कुछ कर्मचारी इस पहल को ‘स्ट्रेस बस्टर’ के रूप में देख रहे हैं, वहीं कई अफसर इसे नियमों का उल्लंघन मानते हुए सवाल भी उठा रहे हैं कि क्या व्यक्तिगत शौक पूरे करने के लिए सरकारी बजट का इस्तेमाल सही है?

अब देखना ये है कि क्या शासन इस प्रकरण पर कोई जांच या कार्रवाई करता है, या फिर मैडम के रियाज़ की धुनों में सब कुछ दबकर रह जाएगा? सवाल ये भी है कि क्या सरकारी पैसे से सीखी गई ये संगीत कला कभी विभागीय कामकाज में काम आएगी या नहीं?