महाराष्ट्र (राष्ट्र की परम्परा) पंढरपुर भक्तिभाव, भजन, कीर्तन और वारकरी परंपरे के रंग में रंगा पंढरपुर नगरी में आषाढी एकादशी का महापर्व पूरे उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। लाखों वारकरी ‘ज्ञानोबा-तुकाराम’ के गजर के साथ पंढरपुर पहुंच चुके हैं। विठोबा-रुक्मिणी मंदिर में दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें सुबह से ही देखी जा रही हैं।

मुख्य पूजाविधि संपन्न हुई, जिसमें महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री व अन्य मंत्रीगणों की उपस्थिति भी रही। पारंपरिक वेशभूषा में वारकरी, टाळ-मृदुंग की लय, अबंग-भजनों की गूंज और “माऊली माऊली” के जयघोष से पंढरपुर की गलियां भक्तिरस में डूबी हुई हैं।
राज्य सरकार और जिल्हा प्रशासन ने सुरक्षा, आपात सेवा और स्वास्थ्य सुविधाओं के व्यापक इंतजाम किए हैं। हजारों स्वयंसेवक, एनजीओ, पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी इस ऐतिहासिक पर्व को सफल बनाने में जुटे हुए हैं।

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