Thursday, February 12, 2026
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पटना के मशहूर कारोबारी की हत्या से मचा सियासी भूचाल, विपक्ष ने साधा निशाना


राहुल गांधी बोले- भाजपा और नीतीश कुमार ने बिहार को बना दिया ‘अपराध की राजधानी’

पटना /बिहार, (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। राजधानी पटना में चर्चित व्यवसायी गोपाल खेमका की हत्या ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। सरेशाम हुई इस निर्मम वारदात ने बिहार की कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। पुलिस जहां मामले की जांच में जुटी है, वहीं इस घटना को लेकर बिहार की सियासत में भी उबाल आ गया है। विपक्ष ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को आड़े हाथों लिया है।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए। प्रारंभिक जांच में यह मामला आपसी रंजिश से जुड़ा प्रतीत हो रहा है, लेकिन पुलिस ने कई पहलुओं पर जांच शुरू कर दी है। व्यवसायी खेमका के परिजनों और सहयोगियों से पूछताछ की जा रही है। हालांकि अब तक हत्या के कारणों को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

इसी बीच, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने इस हत्याकांड पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखते हुए दावा किया, “भाजपा और नीतीश कुमार की जोड़ी ने बिहार को अपराधियों के हवाले कर दिया है। आज बिहार देश की अपराध राजधानी बन चुकी है। यह आम जनता की सुरक्षा के साथ बड़ा खिलवाड़ है।”

राहुल गांधी ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य में न तो आम आदमी सुरक्षित है और न ही कारोबारी वर्ग। उन्होंने यह भी पूछा कि जब राजधानी पटना में दिनदहाड़े एक नामी व्यवसायी की हत्या हो सकती है, तो फिर बाकी राज्य की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।

राजद, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने भी इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से इस्तीफे की मांग की है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इसे राज्य सरकार की ‘पूर्ण विफलता’ करार दिया।

सरकार की सफाई और कार्रवाई
बिहार सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एसआईटी (विशेष जांच दल) का गठन कर दिया है। पुलिस का दावा है कि जांच में तेजी लाई गई है और जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी। गृह विभाग ने पटना के वरीय पुलिस अधीक्षक से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

बहरहाल, गोपाल खेमका की हत्या ने एक बार फिर बिहार की गिरती कानून-व्यवस्था और बढ़ते अपराध को लेकर राज्य सरकार की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में यह मामला न केवल पुलिस-प्रशासन की परीक्षा बनेगा, बल्कि सियासी दलों के बीच जुबानी जंग का प्रमुख मुद्दा भी बनता दिख रहा है।

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