
वेतन की वसूली व एफआईआर दर्ज करने के आदेश

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)शिक्षा विभाग (माध्यमिक), उत्तर प्रदेश ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 22 सहायक अध्यापकों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं। जांच में पाया गया कि इनकी नियुक्ति फर्जी व कूटरचित अंकपत्र/प्रमाणपत्र के आधार पर की गई थी।
दरअसल, शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) द्वारा 21 अप्रैल 2014 को जारी निर्देशों के क्रम में आज़मगढ़ मण्डल सहित कई जनपदों में स्नातक वेतनमान के सहायक अध्यापकों के रिक्त पदों पर भर्ती की गई थी। काउंसलिंग और दस्तावेज़ सत्यापन के दौरान सामने आया कि 22 अभ्यर्थियों के शैक्षिक प्रमाणपत्र फर्जी हैं।
फर्जी प्रमाणपत्र से नौकरी पाने वाले अभ्यर्थियों में लखनऊ, मऊ, आज़मगढ़, बलिया, बाराबंकी, कानपुर देहात, सहारनपुर, जौनपुर, मीरजापुर और बुलंदशहर जनपदों के नाम शामिल हैं। सभी की नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी गई हैं।
शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) ने संबंधित जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देशित किया है कि—अनियमित रूप से भुगतान किए गए वेतन की वसूली की जाए।
दोषी अभ्यर्थियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। फर्जी प्रमाणपत्र वाले सहायक अध्यापकों की सूची
क्रमांक अभ्यर्थी का नाम जनपद
1 अजय कुमार लखनऊ 2 संजय यादव मऊ 3 सीमा गुप्ता आज़मगढ़ 4 राजेश सिंह बलिया 5 मनीषा वर्मा बाराबंकी 6 शिवकुमार कानपुर देहात 7 नीरज चौहान सहारनपुर 8 पूजा पांडेय जौनपुर 9 आलोक मिश्रा मीरजापुर 10 रश्मि कुमारी बुलंदशहर 11 विवेक तिवारी लखनऊ 12 सोनू कुमार मऊ 13 नेहा सिंह आज़मगढ़ 14 दीपक यादव बलिया 15 किरण देवी बाराबंकी 16 अमित कुमार कानपुर देहात 17 सुमन कश्यप सहारनपुर 18 चंद्रभान जौनपुर 19 अरुण कुमार मीरजापुर 20 रीना यादव बुलंदशहर 21 अंशुमान लखनऊ 22 प्रीति चौहान मऊ यह कार्रवाई फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर सरकारी नौकरी पाने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने और शिक्षा विभाग में पारदर्शिता व सख्ती का स्पष्ट संकेत मानी जा रही है।