18 वर्षों की सेवा, फिर भी अस्थायी जीवन! ग्राम रोजगार सेवकों की व्यथा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष तक पहुंची


महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।ग्रामीण भारत में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को धरातल पर उतारने में अहम भूमिका निभाने वाले ग्राम रोजगार सेवक आज खुद अपने अधिकारों और अस्तित्व की लड़ाई लड़ने को मजबूर हैं। बीते 18 वर्षों से निरंतर सेवा देने के बावजूद उन्हें न तो नियमित कर्मचारी का दर्जा मिला और न ही समय पर मानदेय। इसी गंभीर स्थिति को लेकर उत्तर प्रदेश ग्राम रोजगार सेवक संघ ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी को रजिस्टर्ड पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है।

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संघ के जिला अध्यक्ष/प्रांतीय उपाध्यक्ष ब्रह्मानंद द्वारा भेजे गए पत्र में बताया गया है कि प्रदेश के हजारों ग्राम रोजगार सेवकों को पिछले छह माह या उससे अधिक समय से मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है। इससे उनके सामने परिवार के भरण-पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों का संकट खड़ा हो गया है। आर्थिक दबाव के बावजूद उनसे लगातार सरकारी योजनाओं का काम बिना अतिरिक्त पारिश्रमिक के कराया जा रहा है।
पत्र में यह भी उल्लेख है कि ग्राम रोजगार सेवकों से मनरेगा के साथ-साथ वीबी जीरामजी योजना सहित अन्य विभागीय कार्य भी लिए जा रहे हैं, लेकिन इसके लिए न तो अलग मानदेय तय है और न ही बजटीय व्यवस्था। संघ ने मांग की है कि सरकार पृथक वित्तीय प्रावधान करते हुए मानदेय को न्यूनतम 35 हजार रुपये प्रतिमाह निर्धारित करे और भुगतान की प्रक्रिया समयबद्ध हो।

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संघ का कहना है कि लगभग दो दशक की सेवा के बाद भी ग्राम रोजगार सेवक आज भी अस्थायी कर्मचारी बने हुए हैं। न सेवा सुरक्षा है, न भविष्य की गारंटी। ऐसे में सभी पात्र ग्राम रोजगार सेवकों को नियमित कर्मचारी घोषित किए जाने की मांग प्रमुखता से उठाई गई है। साथ ही उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुरूप दिवंगत ग्राम रोजगार सेवकों के आश्रितों को उसी पद पर समायोजित करने की मांग भी की गई है।

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पत्र में यह भी याद दिलाया गया है कि 4 अक्टूबर 2021 को लखनऊ के डिफेंस एक्सपो मैदान में मुख्यमंत्री द्वारा ग्राम रोजगार सेवकों के लिए एचआर पॉलिसी लागू करने सहित कई घोषणाएं की गई थीं, लेकिन वर्षों बाद भी वे घोषणाएं फाइलों से बाहर नहीं आ सकीं।
डिजिटल प्रणाली के बढ़ते दबाव का जिक्र करते हुए संघ ने कहा है कि ऑनलाइन उपस्थिति और डिजिटल मास्टर रोल के लिए ग्राम रोजगार सेवकों को निजी मोबाइल और इंटरनेट का उपयोग करना पड़ता है। ऐसे में सरकार द्वारा उच्च गुणवत्ता का मोबाइल या टैबलेट उपलब्ध कराना आवश्यक है।
अंत में संघ ने चेतावनी दी है कि यदि समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो प्रदेश भर में ग्राम रोजगार सेवकों का असंतोष आंदोलन का रूप ले सकता है।

Editor CP pandey

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