जब प्रशासन चूका, तब आगे आए अभय मिश्रा—श्मशान घाट की तस्वीर बदली
भागलपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)देवरिया जनपद के भागलपुर क्षेत्र स्थित कालीचरण घाट के पास बने श्मशान घाट की लंबे समय से चली आ रही बदहाली आखिरकार एक समाजसेवी की पहल से सुधरती नजर आ रही है। वर्षों से उपेक्षित इस श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। घाट तक पहुंचने के लिए न तो कोई समुचित रास्ता था और न ही जमीन समतल थी, जिससे हर बार लोगों को जोखिम उठाकर नीचे उतरना पड़ता था।
स्थानीय लोगों के अनुसार, कालीचरण घाट के समीप स्थित यह श्मशान घाट क्षेत्र का प्रमुख अंतिम संस्कार स्थल है, जहां रोजाना कई लोग अपने परिजनों का अंतिम संस्कार करने पहुंचते हैं। लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए जो रास्ता था, वह बेहद खतरनाक और असुविधाजनक था। ऊंची-नीची जमीन, दरारें और ढलानें लोगों के लिए मुसीबत बनी हुई थीं। विशेष रूप से बुजुर्गों और महिलाओं के लिए यह रास्ता किसी चुनौती से कम नहीं था। कई बार लोग फिसलकर गिर भी जाते थे, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती थी।
ऐसे हालात में जब समाजसेवी एवं भावी जिला पंचायत प्रत्याशी अभय मिश्रा एक अंतिम संस्कार में शामिल होने वहां पहुंचे, तो उन्होंने इस समस्या को करीब से देखा। घाट की स्थिति को देखकर उन्होंने तुरंत इसे सुधारने का निर्णय लिया। बिना किसी देरी के उन्होंने जेसीबी मशीन मंगवाई और अपने निजी खर्च से घाट की सफाई और समतलीकरण का कार्य शुरू कराया।
समतलीकरण के दौरान घाट पर मिट्टी और रेत डालकर जमीन को समतल किया गया, जिससे एक वैकल्पिक कच्चा मार्ग तैयार हो सका। इस कार्य के पूरा होने के बाद अब घाट तक पहुंचना पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है। लोग अब बिना किसी जोखिम के अपने परिजनों के शव को घाट तक ले जा सकते हैं और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को सम्मानजनक ढंग से पूरा कर सकते हैं।
इस पहल के बाद स्थानीय लोगों में काफी खुशी देखी जा रही है। ग्रामीणों ने बताया कि यह समस्या वर्षों से बनी हुई थी, लेकिन प्रशासन की ओर से इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ऐसे में अभय मिश्रा द्वारा उठाया गया यह कदम सराहनीय है और अन्य लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।
स्थानीय निवासी कहते हैं कि श्मशान घाट जैसे संवेदनशील स्थान पर बुनियादी सुविधाओं का होना बेहद जरूरी है। यह केवल एक रास्ते का निर्माण नहीं है, बल्कि यह मानवीय संवेदनाओं का सम्मान भी है। इस कार्य से न केवल लोगों की परेशानी कम हुई है, बल्कि दुर्घटनाओं की संभावना भी काफी हद तक समाप्त हो गई है।
समाजसेवी अभय मिश्रा ने कहा कि उन्होंने यह कार्य मानवता के नाते किया है और भविष्य में भी क्षेत्र के विकास के लिए इसी तरह प्रयास करते रहेंगे। उनका मानना है कि समाज की छोटी-छोटी समस्याओं को समय रहते हल करना ही सच्ची सेवा है।
यह पहल न सिर्फ एक रास्ता बनाने की कहानी है, बल्कि यह दिखाती है कि यदि इच्छाशक्ति हो तो बिना किसी सरकारी सहायता के भी समाज के लिए सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। कालीचरण घाट का यह श्मशान घाट अब लोगों के लिए राहत का प्रतीक बन चुका है।
