फोटो x

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। विजयादशमी के पावन पर्व पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों समेत समूचे राष्ट्र को शुभकामनाएं देते हुए प्रभु श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर साझा संदेश के जरिए लोगों को सत्य, धर्म, मर्यादा और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। संदेश का मूल भाव स्पष्ट है—अहंकार चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंत में विजय सत्य और धर्म की ही होती है।


विजयादशमी यानी दशहरा केवल रावण के पुतले को जलाने और उत्सव मनाने का अवसर नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर छिपी बुराइयों को पहचानकर उन्हें समाप्त करने का भी पर्व है। मुख्यमंत्री के संदेश की भावना यही है कि मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के जीवन-मूल्यों को अपनाकर व्यक्ति अपने जीवन को बेहतर बना सकता है और समाज में सकारात्मक बदलाव की नींव रख सकता है।
प्रभु श्रीराम का जीवन त्याग, धैर्य, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और न्याय का ऐसा उदाहरण है, जो हर युग में मानवता को दिशा देता है। उनका चरित्र सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी सत्य का साथ नहीं छोड़ना चाहिए। विजयादशमी का पर्व इसी संकल्प को दोहराने का अवसर है कि जीवन में कितनी भी चुनौतियां आएं, धर्म और सदाचार के रास्ते से विचलित नहीं होना चाहिए।
आज जब समाज कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब दशहरे का संदेश और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। अहंकार, क्रोध, ईर्ष्या, द्वेष और नकारात्मकता जैसी बुराइयां व्यक्ति के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द को भी कमजोर करती हैं। ऐसे में रावण दहन की सार्थकता तभी है, जब हम अपने भीतर मौजूद इन बुराइयों को खत्म करने का संकल्प लें।
मुख्यमंत्री के संदेश से जुड़ी पर्व की प्रेरणा लोगों को यह भी याद दिलाती है कि सच्ची विजय किसी दूसरे को पराजित करने में नहीं, बल्कि अपने अवगुणों पर नियंत्रण पाने, अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करने और समाज के हित में काम करने में है। प्रभु श्रीराम के आदर्श हमें मर्यादा, न्याय, करुणा और लोककल्याण का रास्ता दिखाते हैं।
‘यतो धर्मस्ततो जयः’—जहां धर्म है, वहीं विजय है। विजयादशमी का यही शाश्वत संदेश हर व्यक्ति को सत्य और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। यह पर्व परिवार, समाज और राष्ट्र में शांति, सद्भाव, आपसी विश्वास और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने का अवसर भी है।
इस पावन अवसर पर सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और मंगल की कामना की गई। प्रभु श्रीराम के आदर्शों को आत्मसात करने और समाज में सकारात्मकता व लोकमंगल की भावना बढ़ाने का संकल्प ही विजयादशमी के पर्व को वास्तविक अर्थों में सार्थक बना सकता है।