Monday, February 23, 2026
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लाखों की सड़क 15 दिन में धराशायी: महराजगंज में पैचिंग ध्वस्त, PWD कटघरे में

महराजगंज में 15 दिन में उखड़ी सड़क: डोमा-कलनही मार्ग की पैचिंग ध्वस्त


महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)निचलौल क्षेत्र महराजगंज में 15 दिन में उखड़ी सड़क का मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ गया है। डोमा-कलनही मार्ग की पैचिंग ध्वस्त होने से सड़क पर गिट्टियां बिखर गई हैं, जिससे रोजाना हजारों लोगों की जान जोखिम में है। लाखों रुपये खर्च कर कराई गई मरम्मत महज दो हफ्तों में उखड़ने से PWD की कार्यप्रणाली और गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
डोमा-कलनही मार्ग बना हादसों का कारण
डोमा, कलनही और आसपास के गांवों को जोड़ने वाला यह मुख्य संपर्क मार्ग क्षेत्र की जीवनरेखा माना जाता है। प्रतिदिन करीब पांच हजार छात्र-छात्राएं और हजारों ग्रामीण इसी रास्ते से स्कूल, कॉलेज, बाजार और अस्पताल तक पहुंचते हैं।
लेकिन महराजगंज में 15 दिन में उखड़ी सड़क ने हालात बदतर कर दिए हैं। सड़क की ऊपरी परत उखड़कर गिट्टियां सड़क पर फैल गई हैं, जिससे दोपहिया वाहन चालकों के फिसलने का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में कई लोग मामूली रूप से चोटिल भी हो चुके हैं।

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पैचिंग ध्वस्त: गुणवत्ता पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क मरम्मत कार्य केवल औपचारिकता निभाने के लिए किया गया।सड़क की समुचित सफाई नहीं की गई,बेस लेयर को मजबूत नहीं किया गया
जल्दबाजी में गिट्टी और तारकोल डालकर कार्य पूरा दिखाया गया,गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की गई,परिणामस्वरूप हल्की बारिश और धूप के बाद ही पैचिंग ध्वस्त हो गई। महराजगंज में 15 दिन में उखड़ी सड़क अब भ्रष्टाचार और लापरवाही की मिसाल बनती दिख रही है।
PWD पर मिलीभगत के आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि संबंधित अधिकारियों की निगरानी केवल कागजों तक सीमित रही। यदि कार्य मानक के अनुरूप किया जाता तो सड़क इतनी जल्दी नहीं उखड़ती।
लोक निर्माण विभाग (PWD) के अवर अभियंता राम नरेश मौर्य ने मौसम को जिम्मेदार बताते हुए कहा कि कुछ स्थानों पर गिट्टियां उखड़ी हैं और शीघ्र ही दोबारा मरम्मत कराई जाएगी।
हालांकि ग्रामीण इस सफाई से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि यदि शुरुआत में गुणवत्ता सुनिश्चित की जाती तो दोबारा मरम्मत की नौबत ही नहीं आती।

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जांच और कार्रवाई की मांग तेज
ग्रामीणों ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़क टिकाऊ नहीं बन पा रही है, तो यह सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि महराजगंज में 15 दिन में उखड़ी सड़क के मामले में विभाग केवल आश्वासन देगा या जिम्मेदारी तय कर वास्तविक कार्रवाई करेगा।
संभावित खतरे।
दोपहिया चालकों के फिसलने का खतरा
स्कूली बच्चों की सुरक्षा पर संकट,एंबुलेंस और आपातकालीन सेवाओं में देरी,ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर।
महराजगंज में 15 दिन में उखड़ी सड़क का मामला केवल एक मार्ग की बदहाली नहीं, बल्कि सरकारी कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह है। यदि समय रहते गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की गई, तो ऐसी घटनाएं लगातार दोहराई जाती रहेंगी।

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