मेरठ में रिश्तों का खौफनाक अंत! पत्नी और प्रेमी को फांसी की सजा, पति की हत्या कर सांप के डसने की रची थी साजिश

मेरठ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। जिस पत्नी के साथ अमित कश्यप ने जिंदगी बिताने के सपने देखे थे, उसी पर उसकी हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप साबित हुआ। अपने ही पति की हत्या और फिर मौत को सांप के डसने का रूप देने की कोशिश ने इस मामले को बेहद सनसनीखेज बना दिया। मेरठ की अदालत ने इस हत्याकांड में पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को मृत्युदंड सुनाया है। अदालत के फैसले के बाद इलाके में इस वारदात को लेकर फिर चर्चा तेज हो गई है।
मामला मेरठ जिले के बहसूमा थाना क्षेत्र के अकबरपुर सदात गांव का है। यहां अमित कश्यप की 17 अप्रैल 2025 की रात संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। शुरुआती तौर पर घटना को सांप के काटने से हुई मौत दिखाने की कोशिश की गई, लेकिन जांच आगे बढ़ी तो कहानी की परतें खुलने लगीं। पुलिस की पड़ताल में सामने आया कि अमित की मौत प्राकृतिक नहीं, बल्कि हत्या का नतीजा थी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, अमित की हत्या की साजिश कथित तौर पर 12 अप्रैल 2025 को ही रच ली गई थी। वारदात वाली रात अमित को नींद की गोलियां देकर बेहोश करने और फिर गला घोंटकर उसकी हत्या करने का आरोप लगाया गया। इसके बाद शव के पास घोड़ापछाड़ प्रजाति का सांप रख दिया गया, ताकि परिवार और पुलिस को लगे कि अमित की मौत सांप के डसने से हुई है। आरोपियों की मंशा हत्या के पीछे की सच्चाई छिपाने की थी, लेकिन जांच में सामने आए साक्ष्यों ने इस कहानी को पलट दिया।
इस पूरे मामले में पोस्टमार्टम जांच अहम साबित हुई। जांच अधिकारी उपनिरीक्षक इंदु वर्मा ने मौत की परिस्थितियों को देखते हुए पोस्टमार्टम कराने पर जोर दिया। बताया जाता है कि मृतक की पत्नी और परिवार के कुछ सदस्य पोस्टमार्टम के पक्ष में नहीं थे, लेकिन पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया पूरी कराई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण सांप का काटना नहीं, बल्कि गला घोंटना सामने आया। यहीं से पुलिस को हत्या की आशंका की पुष्टि करने वाला महत्वपूर्ण आधार मिला।
जांच आगे बढ़ी तो पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड यानी सीडीआर सहित अन्य साक्ष्यों की पड़ताल की। अभियोजन के मुताबिक, इन जांचों से रविता और अमरदीप के बीच संबंधों से जुड़ी जानकारी सामने आई। पुलिस ने इन्हीं तथ्यों और दूसरे साक्ष्यों को जोड़ते हुए मामले की कड़ियां अदालत के सामने रखीं। जिस मौत को सांप के काटने का परिणाम बताने की कोशिश की गई थी, वही मामला आगे चलकर सुनियोजित हत्या के मुकदमे में बदल गया।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे-12) जयवीर सिंह नगर की अदालत ने मुकदमे की सुनवाई के दौरान गवाहों के बयान और अभियोजन पक्ष की दलीलों पर विचार किया। रिपोर्ट के मुताबिक, मामले में 12 गवाहों की गवाही महत्वपूर्ण रही। सुनवाई के बाद अदालत ने रविता और अमरदीप को हत्या का दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई। अदालत ने अपराध की गंभीरता और परिस्थितियों को देखते हुए इसे दुर्लभतम श्रेणी का मामला माना।
फैसले के दौरान नैतिकता, विश्वास और रिश्तों में धोखे जैसे पहलुओं का भी उल्लेख किए जाने की जानकारी सामने आई है। पति-पत्नी के रिश्ते में विश्वास को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन इस मामले में अभियोजन के आरोपों के मुताबिक उसी रिश्ते का इस्तेमाल हत्या की साजिश को अंजाम देने में किया गया। यही वजह है कि यह मामला केवल हत्या तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कथित तौर पर साक्ष्य छिपाने और मौत की वजह बदलकर पेश करने की कोशिश के कारण भी चर्चा में आया।
अमित कश्यप की मां मुनेश देवी ने फैसले पर संतोष जताते हुए कहा कि उनके बेटे को न्याय मिला है। बेटे को खोने का दर्द अपनी जगह है, लेकिन अदालत के निर्णय से परिवार को न्याय की उम्मीद पूरी होने का एहसास हुआ। दूसरी ओर, रविता के परिवार की ओर से उससे दूरी बना लेने की बात भी सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, उसकी ओर से पैरवी सरकारी वकील कर रहे हैं।
अदालत में दोनों दोषियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश किए जाने और जेल भेजे जाने की जानकारी दी गई है। हालांकि, मृत्युदंड के फैसले के बाद भी कानूनी प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त नहीं होती। दोषियों को उच्च न्यायालय में अपील करने का अधिकार है और मृत्युदंड से जुड़े मामलों में आगे की न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है।
अकबरपुर सदात का यह हत्याकांड कई सवाल छोड़ जाता है। आखिर एक व्यक्ति की मौत को सांप के काटने की घटना दिखाने के लिए इतनी बड़ी साजिश क्यों रची गई? पोस्टमार्टम और पुलिस जांच नहीं होती तो क्या हत्या का राज खुल पाता? इस मामले में जांच अधिकारी की सतर्कता और वैज्ञानिक साक्ष्यों की भूमिका ने एक बार फिर दिखाया कि संदिग्ध मौतों की निष्पक्ष जांच क्यों जरूरी है। अदालत के फैसले ने मामले को निर्णायक मोड़ जरूर दिया है, लेकिन दोषियों के पास उपलब्ध कानूनी विकल्पों के बाद ही आगे की न्यायिक स्थिति स्पष्ट होगी।