Tuesday, February 24, 2026
HomeNewsbeatबोर्ड परीक्षा में “नकल महायज्ञ” का खुलासा: मिश्रित सीटिंग ध्वस्त, वाइस रिकॉर्डिंग...

बोर्ड परीक्षा में “नकल महायज्ञ” का खुलासा: मिश्रित सीटिंग ध्वस्त, वाइस रिकॉर्डिंग बंद, शिकायतकर्ता ही हटाए गए

कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बोर्ड परीक्षा में नकल महायज्ञ का सनसनीखेज खुलासा
कुशीनगर बोर्ड परीक्षा इस समय गंभीर आरोपों के घेरे में है। जिले के कई परीक्षा केन्द्रों पर कथित “नकल महायज्ञ” चलने की चर्चा आम हो गई है। आरोप है कि शासन-प्रशासन की निगरानी के दावों के बावजूद मिश्रित सीटिंग व्यवस्था को दरकिनार कर सुनियोजित तरीके से नकल कराई जा रही है।
सबसे बड़ा खुलासा महर्षि वाल्मीकि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पिपरैचा केन्द्र से जुड़ा है, जहां के बाह्य केन्द्र व्यवस्थापक विजय यादव और स्टेटिक मजिस्ट्रेट अमित कुमार ने संयुक्त पत्र देकर गंभीर अनियमितताओं की शिकायत की।

ये भी पढ़ें – महराजगंज में “ऑपरेशन कार-ओ-बार” की सख्ती, नशे में ड्राइविंग पर कार्रवाई

194 केन्द्र, 1.08 लाख परीक्षार्थी और पारदर्शिता पर सवाल
18 फरवरी से जनपद में 194 परीक्षा केंद्रों पर बोर्ड परीक्षा संचालित है। वर्ष 2026 में कुल 1,08,159 छात्र पंजीकृत हैं।
हाईस्कूल में 58,282 परीक्षार्थी (29,268 बालक, 29,014 बालिकाएं) और इंटरमीडिएट में 51,361 छात्र (25,920 बालक, 25,441 बालिकाएं व अन्य) शामिल हैं।
इतने बड़े पैमाने पर आयोजित कुशीनगर बोर्ड परीक्षा में यदि पारदर्शिता पर सवाल उठें, तो यह पूरी शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित करता है।
मिश्रित सीटिंग व्यवस्था की उड़ रहीं धज्जियां
बोर्ड परीक्षा के नियमों के अनुसार परीक्षार्थियों को “मिश्रित सीटिंग” में बैठाना अनिवार्य है। इसका उद्देश्य किसी एक विद्यालय के छात्रों को समूह में बैठाकर अनुचित लाभ देने से रोकना है।
शिकायत के अनुसार विद्यालय ने अपने छात्रों को अलग कमरों में बैठाया। बाहरी और आंतरिक परीक्षार्थियों को मिलाकर बैठाने की अनिवार्यता का पालन नहीं किया गया।
आरोप है कि इसी ‘अलगाव’ का फायदा उठाकर छात्रों को इमला बोलकर उत्तर लिखवाए गए। यदि यह सही है तो यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि नकल महायज्ञ को संरक्षण देने जैसा है।

ये भी पढ़ें – महराजगंज: बीआरसी घुघली में फूटा शिक्षकों का गुस्सा, काली पट्टी बांधकर लिया प्रशिक्षण

वाइस रिकॉर्डिंग गायब, कैमरे निष्क्रिय
शिकायत पत्र में उल्लेख है कि कई कमरों में वाइस रिकॉर्डिंग की व्यवस्था नहीं थी।
सूत्रों का दावा है कि कुछ कक्षों में सीसीटीवी कैमरे या तो बंद थे या उनकी निगरानी प्रभावी नहीं थी। ऐसे में बोलकर उत्तर लिखवाने की संभावना बढ़ जाती है।
कुशीनगर बोर्ड परीक्षा में यदि तकनीकी निगरानी ही निष्क्रिय हो जाए, तो नकल रोकने के दावे खोखले साबित होते हैं।
शिकायत के बाद कार्रवाई उल्टी दिशा में
सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि शिकायत के बाद नकल माफियाओं पर कार्रवाई करने के बजाय बाह्य केन्द्र व्यवस्थापक को ही हटा दिया गया।
जिला विद्यालय निरीक्षक श्रवण कुमार गुप्त का कहना है कि शिकायत की जांच कराई गई है, केन्द्र व्यवस्थापक को नोटिस दिया गया है और बाह्य केन्द्र व्यवस्थापक की तबीयत खराब होने के कारण उन्हें बदला गया।

ये भी पढ़ें – मोहन सेतु निर्माण में कटान से रुकावट, 10 नए पीलर बनाने की तैयारी

लेकिन शिक्षा जगत में सवाल उठ रहे हैं—
क्या यह कदम दबाव में उठाया गया?
क्या सच उजागर करने वालों को हटाकर नकल महायज्ञ को बचाया जा रहा है?
अभिभावकों और मेधावी छात्रों में रोष
अभिभावकों का कहना है कि यदि कुशीनगर बोर्ड परीक्षा जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में भी पारदर्शिता नहीं रहेगी, तो मेहनती छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा।
मेधावी छात्रों ने आरोप लगाया कि जिन छात्रों ने कथित रूप से पैसा नहीं दिया, उन्हें सीटिंग प्लान के जरिए नुकसान पहुंचाया गया।
यह स्थिति शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।

नकल महायज्ञ की जड़ें कितनी गहरी?
क्या संगठित नेटवर्क कर रहा है संचालन?
सूत्रों के अनुसार यह मामला केवल एक केन्द्र तक सीमित नहीं है। कई परीक्षा केन्द्रों पर कैमरा और वाइस रिकॉर्डिंग व्यवस्था को जानबूझकर प्रभावित किए जाने की चर्चा है।
यदि ऐसा है तो यह एक संगठित तंत्र की ओर इशारा करता है, जहां पहले सीटिंग प्लान तैयार होता है, फिर तकनीकी निगरानी कमजोर की जाती है और उसके बाद सुनियोजित तरीके से इमला बोलकर नकल कराई जाती है।

ये भी पढ़ें – चतरा सिमरिया कसारी जंगल विमान हादसा: तेज बारिश में गिरी एयर एंबुलेंस, 7 की मौत

तकनीकी निगरानी पर उठे सवाल
राज्य स्तर पर दावा किया गया था कि सभी केन्द्रों पर सीसीटीवी और वाइस रिकॉर्डिंग अनिवार्य है।
लेकिन कुशीनगर बोर्ड परीक्षा के इस मामले ने दिखाया कि तकनीकी व्यवस्था होने के बावजूद उसका प्रभावी उपयोग जरूरी है।
यदि कैमरे चालू नहीं हैं या रिकॉर्डिंग सुरक्षित नहीं है, तो जांच कैसे होगी?
प्रशासनिक जवाबदेही तय होगी?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
सीटिंग प्लान में गड़बड़ी करने वाले
तकनीकी निगरानी में लापरवाही बरतने वाले
शिकायत के बाद कार्रवाई में पारदर्शिता न दिखाने वाले
इन सभी स्तरों पर जवाबदेही आवश्यक है।
शिक्षा व्यवस्था की साख दांव पर
नकल महायज्ञ जैसे आरोप केवल एक परीक्षा की साख को नहीं बल्कि पूरे जिले की शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित करते हैं।
यदि मेधावी छात्र हतोत्साहित होंगे, तो भविष्य में ईमानदार प्रयासों का महत्व घटेगा।
आगे क्या?
अब निगाहें जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं।
क्या उच्चस्तरीय जांच होगी?
क्या दोषियों पर कठोर कार्रवाई होगी?
क्या भविष्य में मिश्रित सीटिंग और वाइस रिकॉर्डिंग व्यवस्था को सख्ती से लागू किया जाएगा?

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments