असम से भारत का शक्ति संदेश: डिब्रूगढ़ ELF पर वायुसेना का दमदार एयर शो, पीएम मोदी ने देखी रणनीतिक ताकत

डिब्रूगढ़ (राष्ट्र की परम्परा)भारत की सुरक्षा और सामरिक तैयारियों को लेकर एक बड़ा और स्पष्ट संदेश असम के डिब्रूगढ़ से सामने आया है। चीन, बांग्लादेश और म्यांमार सीमा के बेहद नजदीक स्थित मोरान बाइपास पर बनी इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) पर भारतीय वायुसेना ने शनिवार को भव्य एयर डिस्प्ले का आयोजन किया। इस ऐतिहासिक मौके पर नरेंद्र मोदी स्वयं मौजूद रहे और देश की वायु शक्ति का प्रत्यक्ष प्रदर्शन देखा।
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डिब्रूगढ़ ELF: रणनीति, सुरक्षा और विकास का संगम
पूर्वोत्तर भारत की पहली इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी को इस तरह डिजाइन किया गया है कि आपात स्थितियों में सैन्य और नागरिक—दोनों प्रकार के विमानों की लैंडिंग और टेक-ऑफ संभव हो सके। यह ड्यूल-यूज इंफ्रास्ट्रक्चर प्राकृतिक आपदाओं, राहत-बचाव अभियानों और रणनीतिक जरूरतों के समय त्वरित तैनाती में अहम भूमिका निभाएगा।
यह सुविधा 40 टन तक के लड़ाकू विमानों और 74 टन अधिकतम टेक-ऑफ वजन वाले परिवहन विमानों को संभालने में सक्षम है—जो इसे सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण बनाती है।
वायुसेना का दमदार प्रदर्शन
एयर शो में भारतीय वायुसेना के अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों ने आसमान में शक्ति और सटीकता का शानदार प्रदर्शन किया। सुखोई एसयू-30 एमकेआई और राफेल की गर्जना ने साफ कर दिया कि भारत हर संभावित खतरे के प्रति पूरी तरह सतर्क और तैयार है। परिवहन विमानों और हेलिकॉप्टरों का हवाई प्रदर्शन भी इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहा।
ऐतिहासिक पल: ELF पर उतरे पीएम मोदी
असम के लिए यह एक ऐतिहासिक क्षण रहा जब प्रधानमंत्री मोदी स्वयं डिब्रूगढ़ के मोरान बाइपास स्थित ELF पर उतरे। मंच पर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने उनका स्वागत किया। यह कदम न केवल सुरक्षा बल्कि पूर्वोत्तर में कनेक्टिविटी और विकास के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
विकास परियोजनाओं को नई रफ्तार
प्रधानमंत्री मोदी की असम यात्रा का उद्देश्य केवल सुरक्षा नहीं, बल्कि विकास को भी गति देना है। वे ब्रह्मपुत्र नदी पर बने नए कुमार भास्कर वर्मा सेतु का निरीक्षण करेंगे। इसके बाद गुवाहाटी के लचित घाट पर 5,450 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया जाएगा। इन परियोजनाओं में कनेक्टिविटी, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, उच्च शिक्षा और शहरी परिवहन से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं।
भारत के “चिकन नेक” क्षेत्र की सुरक्षा, सीमावर्ती राज्यों की कनेक्टिविटी और वायुसेना की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता—डिब्रूगढ़ ELF इन सभी का मजबूत आधार बनकर उभरा है। यह आयोजन न केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन था, बल्कि एक स्पष्ट संदेश भी कि भारत अपनी सीमाओं और नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर स्तर पर तैयार है।
