प्रशासनिक लापरवाही या साजिश? सड़क विवाद में अधिवक्ता की संदिग्ध मौत

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा) जिले के बरहज थाना क्षेत्र से एक बेहद संवेदनशील और दुखद घटना सामने आई है, जहां सड़क निर्माण को लेकर शुरू हुआ विवाद एक बुजुर्ग अधिवक्ता की मौत पर जाकर खत्म हुआ। इस घटना ने पूरे इलाके में आक्रोश और तनाव का माहौल पैदा कर दिया है। परिजनों ने ग्राम प्रधान समेत कई लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, बरहज थाना क्षेत्र के काशीपुर गांव निवासी प्रशांत सिंह ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि उनके मकान के सामने स्थित चकमार्ग पर ग्राम प्रधान राजेश यादव द्वारा जबरन सड़क निर्माण कराया जा रहा था। इस निर्माण को लेकर पहले से ही विवाद चल रहा था और प्रशांत सिंह के पिता स्वर्गीय विजेन्द्र सिंह (68 वर्ष), जो बरहज तहसील के वरिष्ठ अधिवक्ता थे, ने इस मामले में प्रशासन से शिकायत कर निर्माण कार्य रुकवाने की मांग की थी।
बताया जा रहा है कि लगभग दस दिन पहले नायब तहसीलदार मौके पर पहुंचे थे और उन्होंने जांच के बाद सड़क निर्माण को रुकवा दिया था। इसके बावजूद आरोप है कि ग्राम प्रधान राजेश यादव लगातार निर्माण कराने का प्रयास करता रहा और मृतक अधिवक्ता को धमकियां भी दी जाती रहीं।
घटना के दिन 05 अप्रैल 2026 को दोपहर करीब 12:30 बजे स्थिति अचानक बिगड़ गई। आरोप के अनुसार, ग्राम प्रधान अपने सहयोगियों के साथ मौके पर पहुंचा और कथित रूप से हथियारों के बल पर दोबारा सड़क निर्माण शुरू करा दिया। जब अधिवक्ता विजेन्द्र सिंह ने इसका विरोध किया तो उनके साथ गाली-गलौज, धक्का-मुक्की और अभद्र व्यवहार किया गया।
परिजनों का आरोप है कि इस दौरान मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और विवाद बढ़ता चला गया। स्थिति को संभालने के लिए स्थानीय प्रशासन को सूचना दी गई। आरोप यह भी है कि जब एसडीएम बरहज मौके पर पहुंचे तो उन्होंने निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय ग्राम प्रधान का पक्ष लिया और अधिवक्ता को ही धमकाने का प्रयास किया।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच बुजुर्ग अधिवक्ता की तबीयत अचानक बिगड़ गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वह अत्यधिक तनाव और धक्का-मुक्की के कारण गिर पड़े और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों में दहशत फैल गई और गांव में भारी तनाव का माहौल बन गया।
मृतक के परिजनों ने इस घटना को एक सुनियोजित साजिश बताया है। उनका कहना है कि ग्राम प्रधान और उसके सहयोगियों द्वारा लगातार दबाव बनाया जा रहा था और प्रशासन की मिलीभगत के चलते यह दुखद घटना हुई। परिजनों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में लिया। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी गई है और सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी।
इस घटना ने न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे जिले में प्रशासनिक कार्यशैली और कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते विवाद का सही समाधान किया गया होता तो शायद यह घटना टाली जा सकती थी।
फिलहाल गांव में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। प्रशासन का कहना है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना इस बात का उदाहरण बनकर सामने आई है कि छोटे-छोटे स्थानीय विवाद यदि समय रहते सुलझाए न जाएं तो वे किस तरह गंभीर और जानलेवा रूप ले सकते हैं।
