
गाजियाबाद (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)गाजियाबाद में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से अगस्त के बीच जिले में 1,18,795 लोग कुत्तों के काटने से प्रभावित हुए। यानी इस अवधि में औसतन करीब 487 लोग रोजाना इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे।
मार्च में सबसे ज्यादा मामले सामने आए। इस महीने 18,913 लोगों को कुत्तों के काटने के बाद उपचार की जरूरत पड़ी। इसके बाद अप्रैल से अगस्त तक भी हर महीने 10 हजार से अधिक मामले दर्ज होते रहे। आंकड़े बताते हैं कि गर्मी के महीनों में भी कुत्तों के हमलों का सिलसिला थमा नहीं।
गलियों से बाजार तक बढ़ा डर
शहर के कई रिहायशी इलाकों और बाजारों में आवारा कुत्तों के झुंड लोगों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बच्चों, बुजुर्गों और सुबह-शाम घर से निकलने वाले लोगों में कुत्तों के हमले को लेकर डर बढ़ रहा है।
बढ़ते मामलों के बीच एंटी-रेबीज वैक्सीन की उपलब्धता और समय पर इलाज को लेकर भी चिंता बनी हुई है। कुत्ते के काटने के बाद रेबीज से बचाव के लिए तत्काल चिकित्सकीय सलाह और निर्धारित टीकाकरण बेहद जरूरी माना जाता है।
नसबंदी और टीकाकरण अभियान तेज करने की मांग
कुत्तों के बढ़ते हमलों को देखते हुए नगर निगम और स्थानीय प्रशासन पर प्रभावी कार्रवाई का दबाव बढ़ रहा है। नागरिकों की मांग है कि संवेदनशील इलाकों की पहचान कर आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण अभियान को तेज किया जाए। साथ ही, ऐसे स्थानों पर निगरानी और शिकायतों के त्वरित निस्तारण की व्यवस्था मजबूत हो।
1,18,795 मामलों का आंकड़ा शहर में आवारा कुत्तों से जुड़ी समस्या की गंभीरता को सामने रखता है। अब स्थानीय लोगों की नजर प्रशासन और नगर निगम की कार्रवाई पर है कि बढ़ते हमलों को रोकने के लिए जमीनी स्तर पर कितने प्रभावी कदम उठाए जाते हैं।
