बदलते शैक्षिक परिवेश के अनुरूप स्वयं को निरंतर अद्यतन करें शिक्षक : प्रो. संजीव कुमार
अध्ययन, मनन और चिंतन से ही बनता है श्रेष्ठ शिक्षक : प्रो. पी. सी. त्रिवेदी
डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय में 12वें फैकल्टी इंडक्शन प्रोग्राम (गुरु दक्षता) का शुभारम्भ, 13 राज्यों के 143 शिक्षक ले रहे हैं प्रशिक्षण
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर के यूजीसी–मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र द्वारा आयोजित 12वें फैकल्टी इंडक्शन प्रोग्राम (गुरु दक्षता) का शुभारम्भ बुधवार को ऑनलाइन माध्यम से हुआ। चार सप्ताह तक चलने वाला यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 15 जुलाई से 11 अगस्त, 2026 तक आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम का उद्देश्य नव नियुक्त एवं कार्यरत शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, नवाचारपूर्ण शिक्षण पद्धतियों, अनुसंधान, शैक्षणिक नेतृत्व तथा उच्च शिक्षा की समकालीन आवश्यकताओं से परिचित कराना है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि नई शिक्षा नीति के परिप्रेक्ष्य में शिक्षकों की भूमिका पहले की अपेक्षा कहीं अधिक व्यापक और उत्तरदायित्वपूर्ण हो गई है। शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि भावी पीढ़ी का निर्माता है। उन्होंने शिक्षकों से गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, उत्कृष्ट अनुसंधान तथा उच्च स्तरीय शोध प्रकाशनों के प्रति समर्पित रहने का आह्वान किया। उन्होंने वन नेशन, वन सब्सक्रिप्शन जैसी राष्ट्रीय पहल का अधिकतम उपयोग करते हुए शोध एवं प्रकाशन की गुणवत्ता बढ़ाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि निरंतर सीखना, नवाचार तथा शैक्षणिक उत्कृष्टता ही भारतीय उच्च शिक्षा को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिला सकती है।
मुख्य अतिथि महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय, आजमगढ़ के कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने कहा कि आज का शिक्षक केवल ज्ञान देने वाला नहीं, बल्कि शोधकर्ता, नवप्रवर्तक और दूरदर्शी चिंतक भी होना चाहिए। प्रत्येक विद्यार्थी अपने भीतर असीम संभावनाएँ लेकर आता है और शिक्षक का दायित्व उन संभावनाओं को पहचानकर उन्हें सही दिशा देना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा अब केवल पारंपरिक कक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि डिजिटल प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा नवाचार आधारित शिक्षण की ओर अग्रसर है। बदलती पीढ़ी की आवश्यकताओं को समझते हुए शिक्षकों को स्वयं को समयानुकूल बनाना होगा
सारस्वत अतिथि एवं दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. पी. सी. त्रिवेदी ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि शिक्षा एक पुष्प के समान है, जिसकी सुगंध तभी फैलती है जब शिक्षक और विद्यार्थी समान समर्पण के साथ ज्ञानार्जन की प्रक्रिया में सहभागी बनते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि व्यक्तित्व का समग्र विकास करना है। उन्होंने शिक्षकों से अध्ययन, अध्यापन, मनन और चिंतन को अपनी सतत शैक्षणिक संस्कृति का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
एमएमटीटीसी के निदेशक प्रो. अजय कुमार शुक्ल ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि माननीय कुलपति प्रो. पूनम टंडन के प्रेरणादायी नेतृत्व एवं सतत मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय में शिक्षक क्षमता संवर्धन हेतु अनेक अभिनव कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान का संप्रेषक नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का प्रमुख आधार है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों के व्यक्तित्व, शिक्षण कौशल, अनुसंधान क्षमता तथा शैक्षणिक नेतृत्व को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। उन्होंने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण की प्रत्येक गतिविधि में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करते हुए कार्यक्रम का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम समन्वयक प्रो. अनिल कुमार यादव ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की.
इस फैकल्टी इंडक्शन प्रोग्राम में 143 प्रतिभागी पंजीकृत हैं, जो 30 से अधिक विषयों एवं उनके अनेक उप-विषयों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इनमें भाषा एवं साहित्य, विज्ञान, वाणिज्य एवं प्रबंधन, सामाजिक विज्ञान, राजनीति एवं विधि, शिक्षा, कंप्यूटर विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान, पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान, संगीत, चित्रकला तथा भारतीय ज्ञान प्रणाली सहित अनेक विषय शामिल हैं। प्रतिभागी उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु तथा तेलंगाना सहित 13 राज्यों के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों से जुड़े हैं।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. पूर्णिमा मिश्रा ने किया, जबकि सह-समन्वयक डॉ. आकाश अग्रवाल ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।
