राष्ट्र की परम्परा डेस्कअमेरिका और चीन के बीच बढ़ती व्यापारिक टकराव की गूँज अब अमेरिकी खेतों तक पहुँच रही है। चीन ने अमेरिका से सोयाबीन की खरीद को लगभग शून्य कर दिया है, जिससे अमेरिकी किसानों की चिंता बढ़ गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब इस मसले को लेकर सक्रिय हो गए हैं और उन्होंने संकेत दिया है कि शी जिनपिंग के साथ बातचीत के माध्यम से इस संकट का हल निकालना उनका उद्देश्य है।
ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए टेरिफ ने अमेरिका की अर्थव्यवस्था में हलचल मचा दी है। हालांकि ट्रंप इसे अपने देश की इकॉनमी को बढ़ावा देने का तरीका बता रहे हैं, लेकिन किसानों के लिए यह भारी पड़ रहा है। मक्का और सोयाबीन जैसी प्रमुख फसलें टेरिफ युद्ध की चपेट में हैं और किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने कहा कि वह शी जिनपिंग से आगामी एशिया प्रशांत आर्थिक सहयोग शिखर सम्मेलन में मिलेंगे और सोयाबीन के मुद्दे को उठाएंगे। अमेरिकी रिपब्लिकन सांसद भी लगातार ट्रंप पर दबाव डाल रहे हैं कि वे किसानों के हित में कदम उठाएँ।
हालांकि, इस बीच अमेरिकी सोयाबीन बाजार में हलचल जारी है। पशु आहार और जैव ईंधन में उपयोग होने वाले तिलहन के नवंबर डिलीवरी वाले अनुबंधों में 0.8% की बढ़ोतरी हुई, जिससे गिरावट की स्थिति रुक गई।
कृषि क्षेत्र पर लागतों का बढ़ना भी चिंता का विषय बना हुआ है। बीज, उर्वरक और अन्य कृषि सामग्री की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लगभग एक दशक में यह दो साल की सबसे खराब गिरावट के बाद बेंचमार्क अमेरिकी सोयाबीन की कीमतें स्थिर होने लगी हैं, लेकिन वैश्विक मांग में अनिश्चितता बनी हुई है।
अमेरिकी किसानों और उनके समर्थक रिपब्लिकन पदाधिकारियों के लिए अब दांव बहुत ऊँचा है। यह संघर्ष केवल व्यापारिक मसला नहीं बल्कि अमेरिका की कृषि सुरक्षा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर भी असर डाल रहा है। ट्रंप की शी जिनपिंग के साथ बैठक से तय होगा कि भविष्य में अमेरिकी सोयाबीन किसानों को राहत मिलेगी या नहीं।
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