World War 3 News। वर्ष 2026 की शुरुआत के साथ ही दुनिया एक बेहद अस्थिर भू-राजनीतिक दौर से गुजर रही है। कई मोर्चों पर जारी युद्ध, तेजी से बनते-बिगड़ते सैन्य गठबंधन, हथियार नियंत्रण संधियों का कमजोर होना और अमेरिका–वेनेजुएला तनाव ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है—क्या दुनिया तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ रही है?
यदि हालात और बिगड़ते हैं और वैश्विक संघर्ष की स्थिति बनती है, तो कौन सा देश किस गुट में खड़ा होगा? और इस पूरे परिदृश्य में भारत की भूमिका क्या होगी? आइए समझते हैं पूरी तस्वीर।
क्यों बढ़ रहा है तीसरे विश्व युद्ध का खतरा?
हालांकि अभी तक आधिकारिक रूप से किसी वैश्विक युद्ध की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन दुनिया के कई बड़े संघर्ष आपस में जुड़ते नजर आ रहे हैं—
• रूस–यूक्रेन युद्ध ने नाटो और रूस को आमने-सामने ला खड़ा किया है
• मध्य पूर्व में इजरायल और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है
• ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर वैश्विक चिंताएं बरकरार हैं
• फरवरी 2026 में अमेरिका–रूस न्यू स्टार्ट परमाणु संधि समाप्त होने वाली है
•कोरियाई प्रायद्वीप पर उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच तनाव चरम पर है
• भारत–पाकिस्तान सीमा पर सैन्य निगरानी लगातार जारी है
• वहीं वेनेजुएला पर अमेरिकी दबाव ने दक्षिण अमेरिका में नया भू-राजनीतिक मोर्चा खोल दिया है
इन सभी घटनाओं ने वैश्विक अस्थिरता को और गहरा कर दिया है।
संभावित पश्चिमी गठबंधन (Western Bloc)
अगर तीसरा विश्व युद्ध छिड़ता है, तो एक बड़ा गुट संयुक्त राज्य अमेरिका के नेतृत्व में पश्चिमी देशों का हो सकता है। इसमें शामिल हो सकते हैं—
• अमेरिका और नाटो देश: यूके, फ्रांस, जर्मनी, इटली समेत यूरोप
• इंडो-पैसिफिक सहयोगी: जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया
• रणनीतिक साझेदार: इजरायल और ताइवान
यह गुट लोकतंत्र, सामूहिक सुरक्षा और सैन्य सहयोग के आधार पर एकजुट हो सकता है।
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रूस–चीन नेतृत्व वाला विरोधी गुट
दूसरी ओर, एक संभावित गठबंधन रूस और चीन के नेतृत्व में बन सकता है। इसमें शामिल हो सकते हैं—
• रूस और चीन (मुख्य धुरी)
• उत्तर कोरिया, ईरान, बेलारूस, सीरिया और वेनेजुएला
• पाकिस्तान, जो चीन के साथ गहरे रणनीतिक और सैन्य संबंधों के कारण इस गुट की ओर झुक सकता है
यह गुट पश्चिमी प्रभाव के खिलाफ साझा रणनीति अपना सकता है।
भारत का रुख क्या रहेगा?
तीसरे विश्व युद्ध जैसे किसी भी वैश्विक संघर्ष में भारत की भूमिका सबसे अहम और बारीकी से देखी जाने वाली होगी। भारत के किसी भी सैन्य ब्लॉक में औपचारिक रूप से शामिल होने की संभावना बेहद कम है।
भारत संभवतः अपनी पारंपरिक नीति ‘स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी’ को बनाए रखेगा—
• न पूरी तरह पश्चिमी गुट में
• न ही रूस–चीन धुरी का हिस्सा
हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं होगा कि भारत निष्क्रिय रहेगा।
यदि चीन या पाकिस्तान भारत की सीमाओं पर हमला करते हैं, तो भारत पूरी सैन्य क्षमता के साथ जवाब देगा। साथ ही, भारत कूटनीतिक स्तर पर वैश्विक संतुलन बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
फिलहाल तीसरा विश्व युद्ध एक संभावना है, निश्चित हकीकत नहीं। लेकिन मौजूदा हालात यह संकेत जरूर दे रहे हैं कि दुनिया खेमेबंदी के दौर में प्रवेश कर चुकी है। आने वाले महीनों में कूटनीति, सैन्य संतुलन और वैश्विक समझौतों की भूमिका निर्णायक होगी।
