नवनीत मिश्र
प्रत्येक वर्ष 4 जनवरी को विश्व ब्रेल दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन नेत्रहीन लोगों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाले लुई ब्रेल की याद में समर्पित है। लुई ब्रेल ने 19वीं शताब्दी में एक विशेष लिपि विकसित की, जिसे ब्रेल लिपि कहा जाता है। यह लिपि नेत्रहीनों को पढ़ने और लिखने की क्षमता प्रदान करती है और आज भी शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सहभागिता के अवसरों को बढ़ावा देती है।
ब्रेल लिपि केवल अक्षरों और शब्दों का माध्यम नहीं है, बल्कि यह नेत्रहीन व्यक्तियों के लिए आत्मनिर्भर बनने और समाज में समान योगदान देने का एक शक्तिशाली साधन है। इसके माध्यम से नेत्रहीन छात्र विज्ञान, गणित, साहित्य और तकनीकी क्षेत्रों में उत्कृष्टता प्राप्त कर रहे हैं।
विश्व ब्रेल दिवस न केवल लुई ब्रेल के योगदान को याद करने का अवसर है, बल्कि यह समाज को यह भी याद दिलाता है कि समान अवसर और समावेशिता कितनी महत्वपूर्ण है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य नेत्रहीनों के अधिकारों, उनकी उपलब्धियों और उनके सशक्तिकरण पर ध्यान केंद्रित करना है।
आइए, हम सभी मिलकर नेत्रहीनों के लिए एक समावेशी और अवसर-संपन्न समाज बनाने की दिशा में कदम बढ़ाएँ, ताकि हर दृष्टिहीन व्यक्ति अपने सपनों को पूरा कर सके और समाज में बराबरी का स्थान पा सके।
लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)l प्रदेश में होली पर्व को लेकर घोषित सार्वजनिक अवकाश में…
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय द्वारा बी.फार्मा तृतीय सेमेस्टर, बी.ए. तृतीय सेमेस्टर,…
ज्ञान से भारतीयता परिभाषित होती है, भारतीयता से ज्ञान नहीं: प्रो. अनामिका राय गोरखपुर (राष्ट्र…
संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। पर्यटन विभाग द्वारा प्रख्यापित “उ0प्र0 बेड एण्ड ब्रेकफास्ट एवं…
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस…
आज का पंचांग 28 फरवरी 2026: द्वादशी तिथि, त्रिपुष्कर योग, राहुकाल समय और शुभ मुहूर्त…