बरहज/देवरिया(राष्ट्र क़ी परम्परा)
रविवार को टेकुआ चौराहे के पास ईंट भट्टे पर काम करने वाले असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के साथ अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस, मजदूर अधिकार मंच के बैनर तले मनाया गया। मंच के संयोजक रामकिशोर चौहान ने कहा कि 8मार्च का दिन दुनियां भर के मेहनतकस महिलाओं के संघर्ष, बलिदान, और अधिकारों की लड़ाई का प्रतीक है। 1857में अमेरिका के न्यूयार्क शहर में कपड़ा मिलों में काम करने वाली महिलाओं से उस दौर में उनसे 16- 16घंटे काम कराया जाता था, वेतन बहुत कम था और काम की परिस्थितियां अमानवीय थीं, जिसके खिलाफ महिलाओ ने ऐतिहासिक विद्रोह किया। न्यूयार्क शहर में लगभग 15हजार महिला मजदूरों ने समाजवादी आंदोलन के बैनर तले संघर्ष करते हुए अपने मांगों को मनवाने का कार्य किया, तब जाकर संयुक्त राष्ट्र संघ ने 1975 में 8मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप मे मनाने का विश्व के सभी देशो से आह्वान किया।
शिवचन्द चौहान ने बताया कि आज का दिन मानव इतिहास में स्त्रियों की क्रांतिकारी भूमिका को रेखांकित करने वाला दिन है। वही दयालू चौहान ने कहा कि 1910में अंतराष्ट्रीय मजदूर नेता क्लारा जेटकिन के नेतृत्व में हर साल महिला दिवस मनाने का निर्णय हुआ था। कार्यक्रम के उपरांत मजदूर अधिकार मंच के संयोजक रामकिशोर चौहान ने महिला दिवस पर सभी असंगठित मजदूरों को फल वितरण किया ।इस अवसर पर विमलेश चौहान, प्रतिभा सिंह,शिवानंद चौहान, रामकिशुन दयालू चौहान, शिवचन्द, बंदना, सीमा, रीमा आदि लोग मौजूद रहे।
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