सिकंदरपुर/बलिया(राष्ट्र की परम्परा)
महिला और तहसील कर्मियों के बीच विवाद ने गंभीर रूप ले लिया। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जहां तहसील प्रशासन ने महिला पर शासकीय कार्य में बाधा डालने और दस्तावेज फाड़ने का आरोप लगाया है, वहीं महिला ने तहसीलदार पर अभद्र व्यवहार और धक्का-मुक्की का आरोप मढ़ा है।
जमुई गांव निवासी रीना देवी, पत्नी राजकुमार गोड़, पिछले कई दिनों से जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए तहसील कार्यालय का चक्कर लगा रही थीं। रीना देवी का कहना है कि 29 मई को जब वह जानकारी लेने के लिए तहसीलदार के पास पहुँचीं, तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। आरोप है कि इसके बाद मौजूद गार्ड ने उन्हें पीछे से पकड़कर बाहर निकालने का प्रयास किया, जिसके दौरान धक्का-मुक्की हुई और उनका मंगलसूत्र टूट गया। रीना देवी ने यह भी दावा किया कि उन्हें झूठे केस में फँसाने की धमकी दी गई।
दूसरी ओर, तहसील प्रशासन की ओर लेखपाल सचिन के द्वारा दी गई लिखित तहरीर में कहा गया है कि रीना देवी ने तहसीलदार से बातचीत के दौरान अभद्र भाषा का प्रयोग किया और आवश्यक दस्तावेजों की मांग पर गाली-गलौज करते हुए फाइल फाड़ दी। प्रशासन का कहना है कि महिला दबाव बनाकर जाति प्रमाण पत्र बनवाना चाहती थीं, जिससे शासकीय कार्य में बाधा पहुँची।
दोनों पक्षों ने थाना सिकंदरपुर में अपनी-अपनी शिकायतें दर्ज कराई हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने जांच प्रारंभ कर दी है। वहीं पीड़िता रीना देवी ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए तहसील परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज निकलवाने की अपील की है। उनका कहना है कि फुटेज सामने आने से सच उजागर होगा।
फिलहाल पुलिस ने सभी पहलुओं की जांच शुरू कर दी है। सीसीटीवी फुटेज, चश्मदीदों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासनिक लापरवाही के आरोप सही हैं या फिर सरकारी कार्य में बाधा की साजिश रची गई थी।
यह प्रकरण न केवल आम नागरिकों और सरकारी कर्मियों के बीच संबंधों की नाजुकता को उजागर करता है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। अब सभी की निगाहें पुलिस जांच और सीसीटीवी फुटेज पर टिकी हैं, जो इस विवाद की असल तस्वीर को सामने लाएगी। स्थानीय पुलिस द्वारा महिला को उसके घर जमुई गांव से गिरफ्तार कर लिया गया और 151 की धारा में चालान किया गया
