
सिलेंडर आबादी के बीच आग लगने से मची थी अफरातफरी
बहराइच (राष्ट्र की परम्परा) दैनिक अखबार के युवा पत्रकार संतोष श्रीवास्तव ने एक बार फिर बहादुरी का परिचय देकर लोगों की जान बचाने का काम किया है,घर में खाना बनाने के दौरान गैस रिसाव से सिलेंडर में लगी आग को बुझाकर लोगों का दिल जीत लिया।सैकड़ों की संख्या में मौजूद लोगों ने युवा पत्रकार की हिम्मत को सराहते हुए उन्हें भगवान का भेजा दूत बताया,इससे पहले भी संतोष श्रीवास्तव ने बेजुबान कुत्ते की जान बचाने के लिए 12 फुट गहरे टैंक में उतरकर उसे सुरक्षित बचाकर एक इन्सानियत का मिशाल बने थे।
शहर के बीच स्थित नगर कोतवाली इलाके के जोशिया पुरा मोहल्ला में रहने वाले सोनू के यहां नेपाल के रहने वाले धीरज किराएदार हैं,उस समय अफरातफरी मच गई जब धीरज के एलपीजी सिलेंडर से खाना बनाने के दौरान गैस रिसाव के चलते सिलेंडर में आग लग गई और आग की तेज लपटों को देखकर धीरज जान बचाकर घर के बाहर भागा और शोर शराबा सुनकर आसपास के घरों में रहने वाले लोग भी अपने घरों से बाहर निकल आए और सैकड़ों की भीड़ एकत्रित हो गई, लेकिन सिलेंडर में लगी आग को देखकर किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी कि वह आग बुझाने जाए। सूचना दमकल कर्मियों को दी गई, लेकिन कोई नहीं पहुंचा।
आग लगने की जानकारी से आसपास के लोगों में दहशत का माहौल व्याप्त हो गया और लोग घरों को छोड़कर खुले मैदान में भाग गए जहां सभी अप्रिय घटना से आशंकित हो रहे थे तभी जानकारी पाकर के पत्रकार संतोष श्रीवास्तव भी छायाकार अरुण दीक्षित के साथ मौके पर पहुंचे और लोगों को दूर हटाते हुए संतोष मौके पर पहुंचे और अपनी जान जोखिम में डालकर किसी तरह सिलेंडर में लगे आग को बुझाया,इसके बाद स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली।इस दौरान सभी सिलेंडर फटने की आशंका सहमे रहे,वहां मौजूद लोग पहले तो संवाददाता को दमकल कर्मी समझते रहे, लेकिन जब उन्हें पता चला कि दिलेरी के साथ आग बुझाने वाला युवक पत्रकार है तो उन्होने उसकी हिम्मत को सराहाते हुए आर्शिवाद भी दिया।
भैय्या हमको बता दीजिए सिलैंडर में लगी आग कैसे बुझाई जाती है
बहराइच : जोशियापुरा मोहल्ले में सिलेंडर से आग लगने से मची अफरातफरी के बीच एक महिला युवा पत्रकार के पास पहुंची और उनसे आग बुझाने का उपाय पूछने के साथ आग्रह किया की वहां मोजूद सभी लोगों को भी इसकी जानकारी दे दीजिए, लेकिन जब उन्हें पता चला कि आग बुझाने वाला युवा पत्रकार है तो वे भी उसे अपना आर्शिवाद देने के लिए विवश हो गईं।