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महराजगंज क्यों रह गया विकास की दौड़ में पीछे

कैलाश सिंह

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा )। प्रदेश और देश विकास के नए प्रतिमान गढ़ने की बातें कर रहे हैं। स्मार्ट सिटी, एक्सप्रेस-वे, औद्योगिक कॉरिडोर और डिजिटल सुविधाओं की चर्चा हर मंच पर होती है, लेकिन इसी विकास की दौड़ में महराजगंज आज भी हाशिये पर खड़ा दिखाई देता है। सवाल यह नहीं है कि योजनाएं नहीं आईं, सवाल यह है कि योजनाएं जमीन तक क्यों नहीं पहुंचीं।
महराजगंज प्राकृतिक संसाधनों, उपजाऊ भूमि और मेहनतकश आबादी से समृद्ध जनपद है। सीमावर्ती होने के कारण व्यापार और पर्यटन की अपार संभावनाएं भी यहां मौजूद हैं, लेकिन इन संभावनाओं को दिशा देने वाला दृढ़ नेतृत्व और प्रभावी क्रियान्वयन तंत्र अब तक विकसित नहीं हो पाया।
सबसे बड़ी समस्या योजनाओं का अधूरा क्रियान्वयन है। सड़कें बनती हैं तो कुछ ही महीनों में उखड़ जाती हैं, नालियां कागजों में साफ हो जाती हैं, लेकिन बरसात में सड़कों पर पानी भर जाता है। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकारी दावों और जमीनी सच्चाई के बीच गहरी खाई दिखाई देती है। प्राथमिक विद्यालयों में संसाधनों की कमी और स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों का अभाव आम समस्या बन चुका है।
दूसरा बड़ा कारण राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी है। चुनाव के समय विकास के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन जीत के बाद वही मुद्दे ठंडे बस्ते में चले जाते हैं। जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच समन्वय का अभाव भी विकास को गति नहीं दे पाया। योजनाएं आती हैं, फाइलें चलती हैं, लेकिन जवाबदेही तय नहीं होती।
इसके साथ ही भ्रष्टाचार और लापरवाही ने विकास की रफ्तार को और धीमा किया है। सीमित बजट का सही उपयोग न होना, गुणवत्ता से समझौता और निगरानी तंत्र की कमजोरी जनता के विश्वास को लगातार कमजोर कर रही है।
सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि युवाओं के लिए रोजगार के अवसर न के बराबर हैं। परिणामस्वरूप जिले का युवा वर्ग पलायन को मजबूर है। जो ऊर्जा, जो प्रतिभा महराजगंज के विकास में लगनी चाहिए थी, वह बाहर के शहरों की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही है।
अब समय आ गया है कि महराजगंज को केवल आँकड़ों में नहीं, नीतियों और प्राथमिकताओं में भी स्थान दिया जाए। विकास का मतलब केवल इमारतें और सड़कें नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सम्मान जनक जीवन है। इसके लिए प्रशासनिक पारदर्शिता, जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही और जनता की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है।
यदि अब भी विकास को लेकर गंभीर प्रयास नहीं किए गए, तो महराजगंज यूँ ही विकास की दौड़ में पीछे छूटता रहेगा। सवाल यह नहीं है कि महराजगंज में क्या कमी है, सवाल यह है कि उसे उसका हक़ कब मिलेगा?

rkpnews@desk

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