29 नवंबर : इतिहास में अमर हुए वो दीप
29 नवंबर का दिन भारतीय और विश्व इतिहास में उन महान हस्तियों को याद करने का अवसर है, जिन्होंने अपने ज्ञान, सेवा, साहित्य, राजनीति, उद्योग और समाज परिवर्तन से अमिट छाप छोड़ी। आज हम उन व्यक्तित्वों को नमन करते हैं जिनका 29 नवंबर को निधन हुआ और जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में अमर योगदान दिया।
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इंदिरा गोस्वामी (2010) – असमिया साहित्य की आत्मा बन चुकी लेखिका
असम के गुवाहाटी में जन्मी इंदिरा गोस्वामी, जिन्हें ममता पैंथी के नाम से भी जाना गया, आधुनिक असमिया साहित्य की एक सशक्त आवाज़ थीं। दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाई के बाद उन्होंने समाज, संघर्ष और संवेदना को अपनी कहानियों में जीवंत किया। उनके साहित्य ने पूर्वोत्तर भारत की पीड़ा को वैश्विक मंच तक पहुंचाया।
छबीलदास मेहता (2008) – गुजरात की राजनीति में सादगी और सेवा का प्रतीक
गुजरात के भावनगर जिले में जन्मे छबीलदास मेहता भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के समर्पित नेता थे। उन्होंने गुजरात के नौवें मुख्यमंत्री के रूप में जनकल्याणकारी नीतियों को गति दी। सरल आचरण, सार्वजनिक हित और शिक्षित राजनीतिक सोच के कारण वे राज्य की राजनीति में आदर्श रूप में स्मरणीय बने हुए हैं।
रोमेश चन्द्र दत्त (1909) – बंगला इतिहास का उज्ज्वल स्तंभ
कोलकाता में जन्मे रोमेश चन्द्र दत्त एक उत्कृष्ट इतिहासकार, साहित्यकार और प्रशासक थे। इंग्लैंड में उच्च शिक्षा प्राप्त कर वे भारतीय अर्थव्यवस्था, संस्कृति और इतिहास पर अपने शोध के कारण प्रसिद्ध हुए। उनकी कृतियों ने भारत के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य को नई दृष्टि दी।
जे. आर. डी. टाटा (1993) – औद्योगिक भारत के महान शिल्पकार
पेरिस में जन्मे जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा भारतीय उद्योग जगत के महानायक थे। उन्होंने टाटा एयरलाइंस (वर्तमान एयर इंडिया) की स्थापना कर भारत को नई उड़ान दी। नवाचार, ईमानदारी और राष्ट्र निर्माण की उनकी सोच ने आधुनिक भारत की औद्योगिक रीढ़ को मजबूती प्रदान की।
ओटो न्यूमैन (2015) – शिक्षा और समाजशास्त्र के वैश्विक चिंतक
हंगरी में जन्मे ओटो न्यूमैन एक अमेरिकी समाजशास्त्री और शिक्षा दार्शनिक थे। उन्होंने मानवाधिकार, समाजिक संरचना और शैक्षिक विकास पर शोध कर नई वैचारिक दिशाएं दीं। उनके कार्यों का असर वैश्विक शिक्षा सुधारों पर आज भी देखा जाता है।
ओंकारनाथ श्रीवास्तव (2002) – शब्दों के जादूगर और जनसंचार के ध्वजवाहक
उत्तर प्रदेश के गोंडा जनपद में जन्मे ओंकारनाथ श्रीवास्तव एक संवेदनशील कवि और प्रसिद्ध समाचार प्रसारक थे। रेडियो प्रसारण में उनकी प्रभावशाली आवाज़ वर्षों तक जनविश्वास का आधार बनी रही। उनकी काव्य रचनाओं ने साहित्य जगत में सरलता, भावना और गहराई का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया।
आलमगीर द्वितीय (1759) – मुगल इतिहास की निर्णायक कड़ी
दिल्ली में जन्मे आलमगीर द्वितीय मुगल साम्राज्य के 16वें बादशाह थे। 1754 से 1759 तक शासन के दौरान उन्होंने साम्राज्य को आंतरिक संघर्षों के बीच संभालने का प्रयास किया। उनका काल मुगल इतिहास के संक्रमण काल का महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है।
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