US-Iran युद्ध: Donald Trump का बचाव — “अगर हमने पहले कार्रवाई नहीं की होती, तो वे हमला कर देते”

वॉशिगटन (राष्ट्र की परम्परा)। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने Iran पर हालिया अमेरिकी सैन्य हमलों का जोरदार बचाव किया है। ट्रंप ने कहा कि यह कार्रवाई “रक्षा के लिए जरूरी” थी, क्योंकि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों से संकेत मिले थे कि तेहरान पहले हमला करने की तैयारी कर रहा था।

उनके मुताबिक, यदि अमेरिका ने पहले कदम नहीं उठाया होता तो हालात परमाणु युद्ध तक पहुंच सकते थे।

पश्चिम एशिया में चौथे दिन भी तनाव बरकरार

28 फरवरी को अमेरिका और Israel की ओर से किए गए हवाई हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei समेत कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के मारे जाने की खबर सामने आई।
इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजराइल से जुड़े ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इससे पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता और बढ़ गई है।

‘एक महीने में परमाणु हथियार’ का दावा

व्हाइट हाउस में जर्मनी के चांसलर Friedrich Merz के साथ बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा कि बातचीत जारी थी, लेकिन उन्हें आशंका थी कि ईरान अचानक हमला कर सकता है।

ट्रंप ने दावा किया कि:

• ईरान एक महीने के भीतर परमाणु हथियार बनाने की स्थिति में पहुंच सकता था।
• ईरान की सरकार “खतरनाक और चरमपंथी विचारधारा” से प्रेरित है।
• पूर्व राष्ट्रपति Barack Obama का परमाणु समझौता “सबसे खराब डील” था, जिसे उन्होंने अपने कार्यकाल में समाप्त कर दिया।

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‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ और सैन्य प्रभाव

ट्रंप ने सैन्य अभियान का नाम ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ बताया। उनके अनुसार इस कार्रवाई से:

• ईरान की मिसाइल क्षमता को बड़ा झटका लगा

• एयर डिफेंस सिस्टम कमजोर हुआ

• सैन्य ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचा

ट्रंप ने दावा किया कि अब ईरान की ताकत काफी कमजोर हो चुकी है, हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस दावे पर बहस जारी है।

खाड़ी देशों में बढ़ी चिंता

ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद निम्न देशों में भी हालात तनावपूर्ण हैं:

• Bahrain
• Qatar
• Saudi Arabia
• United Arab Emirates

इन देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने से आम नागरिकों और प्रवासी कामगारों में चिंता बढ़ गई है।

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Karan Pandey

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