Tuesday, March 24, 2026
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हमें भोजन की आवश्यकता है तम्बाकू की नही

विश्व तंबाकू निषेध दिवस 31 मई को मनाया जाएगा

बहराइच (राष्ट्र की परम्परा) तंबाकू सेवन न सिर्फ मानव स्वास्थ्य को प्रभावित करता है l बल्कि इसके उपयोगकर्ताओं का बढ़ता हुआ दायरा दुनिया में खाद्य संकट को भी बढ़ावा दे रहा है। इसके सेवन से जहां हर वर्ष लाखों लोगों की मौत हो जाती है l वहीं दुनिया भर में लगभग 35 लाख हेक्टेयर भूमि हर साल तम्बाकू उगाने के लिए परिवर्तित कर दी जाती है। इसके घातक प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिये प्रत्येक वर्ष 31 मई को ‘विश्व तंबाकू निषेध दिवस’ मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम है “हमें भोजन की आवश्यकता है,तम्बाकू की नहीं”
विश्व तंबाकू निषेध दिवस की शुरुआत विश्व स्वास्थ्य संगठन के सदस्य देशों ने वर्ष 1987 में की थी ताकि तंबाकू से होने वाली मृत्यु तथा बीमारियों के प्रति लोगों को जागरूक किया जा सके। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ सतीश कुमार सिंह ने बताया कि तंबाकू सेवन व तंबाकू उत्पादन करने के मामले में भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर है। इसके सेवन से होने वाले घातक प्रभाव का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि देश में प्रत्येक वर्ष लगभग 3.5 करोड़ लोगों की मौतें तंबाकू के सेवन की वजह से हो जाती हैं। उन्होंने बताया धूम्रपान से कैंसर, दिल का दौरा,ब्रेन स्ट्रोक,क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिज़ीज़ सीओपीडी यानि फेफड़ों का रोग जिसमें सांस लेने में मुश्किल होती है इसके नुकसान को दोबारा ठीक नहीं किया जा सकता l और पेरिफेरल वैस्कुलर डिज़ीज़ पीवीडी यानि शरीर के किसी भी अंग में रक्त प्रवाह का कम होना l विशेषकर पैर की मांसपेशियों में व्यक्ति के मौत का कारण बनती है। तंबाकू का मुनाफा बन सकता है वैश्विक खाद्य संकट – मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि नकद फसल के रूप में तम्बाकू से प्राप्त होने वाला लाभ किसानों को आकर्षित करता है । यही कारण है दुनिया भर में हर साल फसल उगाने वाली करीब 35 लाख हेक्टेयर भूमि को परिवर्तित कर तंबाकू उगाया जाता है। तंबाकू उगाने से मिट्टी में अन्य फसलों,को उगाने की क्षमता कम हो जाती है। इससे मरुस्थली करण की संभावना बढ़ जाती है । वहीं तंबाकू उगाने के लिए विश्व में करीब 2 लाख हेक्टेयर वनों को काट दिया जाता है। इससे पर्यावरण की क्षति होती है । इन चुनौतियों से निपटने के लिए तंबाकू किसानों को दूसरे वैकल्पिक फसल उत्पादन के अवसरों के बारे में जागरूक करना होगा । इससे वैश्विक खाद्य संकट को कम करने में मदद मिलेगी । गैर संचारी रोग क्लीनिक के इंचार्ज डॉ परितोष तिवारी ने बताया कि तंबाकू सेवन के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलाने व तंबाकू से बने पदार्थों के उत्पादन और आपूर्ति को कम के लिए राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम चलाया जा रहा है । इसकी शुरुआत देश में वर्ष 2007 में हुई थी। इसके तहत सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करना,सभी शिक्षण संस्थानों के 100 गज के दायरे में तंबाकू बिक्री व नाबालिगों को तम्बाकू के क्रय तथा विक्रय पर प्रतिबंध है। इसके अलावा इस कार्यक्रम के तहत तंबाकू छोड़ने में लोगों की सहायता भी की जाती है । महिलाओं को ज्यादा खतरा –
डीएचईआईओ बृजेश सिंह के अनुसार तंबाकू का सेवन करने वाली महिलाओं को पुरुषों की अपेक्षा अतिरिक्त खतरों का सामना करना पड़ सकता है। गर्भावस्था के दौरान असामान्य रक्तस्राव ,स्तन,गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर और हृदय संबंधी जोखिम के अलावा गर्भावस्था में धूम्रपान करने से जन्म के समय शिशु का कम वजन ,शिशु को सांस लेने में समस्या बच्चे की सुनने व देखने के में समस्या आ सकती है l

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