बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। हुसैनपुर स्थित ठाकुरबाड़ी मंदिर परिसर में चल रहे श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पूजा समारोह एवं श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के तीसरे और चौथे दिन कथा वाचिका पूज्या सुश्री दिव्यांशी किशोरी ने शिव-पार्वती विवाह, सृष्टि रचना, मनु-शतरूपा और भक्त ध्रुव के चरित्र का विस्तार से वर्णन किया। कथा के विभिन्न प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक भाव से जोड़ दिया।कथा वाचिका ने भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का मनोहारी प्रसंग सुनाते हुए बताया कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की। उनकी अटूट श्रद्धा और तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया। शिव बारात के प्रसंग के दौरान कथा स्थल हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा। विवाह प्रसंग पर प्रस्तुत बधाई गीतों और भक्ति गीतों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।इसके बाद सृष्टि रचना का प्रसंग सुनाते हुए स्वायंभुव मनु और शतरूपा के माध्यम से मानव सृष्टि के विस्तार तथा परिवार एवं सामाजिक व्यवस्था की स्थापना पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने कहा कि मनु-शतरूपा का चरित्र मनुष्य को अपने कर्तव्यों का पालन करने, परिवार में संस्कार बनाए रखने और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।कथा के अगले प्रसंग में राजा उत्तानपाद और उनके पुत्र ध्रुव की कथा सुनाई गई। सौतेली माता के तिरस्कार से आहत बालक ध्रुव ने भगवान की प्राप्ति का दृढ़ संकल्प लेकर कठोर तपस्या की। उनकी अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें दर्शन दिए और आशीर्वाद प्रदान किया।कथा वाचिका ने कहा कि ध्रुव चरित्र दृढ़ संकल्प, धैर्य और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास का संदेश देता है। परिस्थितियां कितनी भी विपरीत क्यों न हों, यदि मनुष्य अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहे तो सफलता अवश्य प्राप्त की जा सकती है।कथा के दौरान आकर्षक झांकियां, भक्ति गीत और संगीतमय प्रस्तुतियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहीं। अंत में आरती हुई, जिसमें बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और युवा श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।आयोजकों ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन 10 सितंबर तक प्रतिदिन शाम सात बजे से किया जा रहा है। कथा के समापन पर 10 सितंबर को विशाल भंडारे का आयोजन होगा।
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