वॉशिंगटन/तेहरान (राष्ट्र की परम्परा)। ईरान की सुप्रीम लीडरशिप को खत्म करने के दावे के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने सोमवार को बयान जारी कर कहा कि ईरान पर हमले का आदेश उन्होंने ही दिया था। उनका दावा है कि यह कदम तेहरान के परमाणु विकास और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को रोकने के लिए उठाया गया।
ट्रंप ने कहा, “हम ईरान को परमाणु संपन्न देश नहीं बनने देंगे। वह तेजी से उसी दिशा में बढ़ रहा था।” हालांकि, उन्होंने अपने दावों के समर्थन में कोई सार्वजनिक सबूत पेश नहीं किया।
“हमला करना हमारा सबसे अच्छा मौका था”
न्यूज एजेंसी Reuters के मुताबिक, ट्रंप ने दो वीडियो संदेश जारी किए। इनमें उन्होंने कहा कि ईरान से बड़ा खतरा उत्पन्न होने वाला था और हमला करना “हमारा आखिरी और सबसे अच्छा मौका” था।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी मुहिम चार से पांच हफ्ते चल सकती है, हालांकि यह और लंबी भी हो सकती है। उनके अनुसार, अभियान का मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना और लंबी दूरी के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को नाकाम करना है। ईरान पहले ही परमाणु हथियार विकसित करने के आरोपों से इनकार करता रहा है।
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10 ईरानी जहाज मार गिराने का दावा
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने 10 ईरानी जहाजों को समुद्र में डुबो दिया है और बड़े स्तर पर लड़ाकू ऑपरेशन जारी हैं। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई का लक्ष्य ईरान की मिसाइल क्षमताओं और नौसैनिक ताकत को कमजोर करना है।
इसके अलावा ट्रंप ने कहा कि अमेरिका का तीसरा मकसद ईरान को मिलिटेंट समूहों को समर्थन देने से रोकना है। उन्होंने अभियान के दौरान चार अमेरिकी सैनिकों की मौत का भी जिक्र किया।
क्षेत्र में बढ़ता तनाव
इस बयान के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि सैन्य कार्रवाई लंबी चली तो इसका असर वैश्विक सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और कूटनीतिक संबंधों पर पड़ सकता है।
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