Saturday, November 29, 2025
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Ujjain Mahakal Mosque Case: उज्जैन महाकाल लोक परिसर की मस्जिद पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, कहा – नमाज कहीं भी अदा की जा सकती है

इंदौर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (Madhya Pradesh High Court) की इंदौर बेंच ने उज्जैन के प्रसिद्ध महाकाल लोक परिसर (Mahakal Lok) में स्थित तकिया मस्जिद (Takiya Masjid) से जुड़े मामले में एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मस्जिद तोड़े जाने के खिलाफ दायर अपील को खारिज करते हुए कहा कि “नमाज कहीं भी अदा की जा सकती है”, इसलिए याचिकाकर्ताओं की मांग न्यायसंगत नहीं है।

यह फैसला जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस बिनोद कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने सुनाया। अदालत ने कहा कि अपीलकर्ताओं के पास मस्जिद के पुनर्निर्माण की मांग का कोई कानूनी अधिकार नहीं है और सरकार द्वारा किया गया भूमि अधिग्रहण पूर्णतः वैध है।

याचिकाकर्ताओं की दलील

याचिकाकर्ता मोहम्मद तैयब सहित अन्य ने दलील दी थी कि तकिया मस्जिद करीब 200 साल पुरानी है और यह जमीन वक्फ बोर्ड की संपत्ति है। उनका कहना था कि सरकार को इसे तोड़ने का अधिकार नहीं था। उन्होंने मस्जिद के पुनर्निर्माण और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की थी।

सरकारी पक्ष का जवाब

सरकारी वकील आनंद सोनी ने कोर्ट में कहा कि भूमि का अधिग्रहण कानूनी प्रक्रिया के तहत किया गया था। संबंधित पक्ष को मुआवजा दिया जा चुका है, और अब यह जमीन सरकारी स्वामित्व में है। साथ ही बताया गया कि वक्फ बोर्ड ने पहले ही भोपाल वक्फ ट्रिब्यूनल में केस दायर किया हुआ है।

न्यायालय की टिप्पणी

हाई कोर्ट ने कहा —

“किसी भी व्यक्ति को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है, लेकिन यह अधिकार किसी विशेष स्थान से जुड़ा नहीं होता। नमाज कहीं भी अदा की जा सकती है।”

इसी आधार पर कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए अपील को खारिज कर दिया।

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