यमन के रणनीतिक बंदरगाह शहर मुकल्ला पर सऊदी अरब की बमबारी के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव और गहरा गया है। इस घटनाक्रम के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने बड़ा फैसला लेते हुए सऊदी अरब से अपने सैनिकों को वापस बुलाने की घोषणा की है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब सऊदी अरब ने यूएई पर यमन भेजे गए एक जहाज के जरिए हथियार सप्लाई करने का आरोप लगाया था।
सुरक्षा कारणों और आतंकवाद-रोधी अभियानों का हवाला
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, यूएई के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि सुरक्षा कारणों और आतंकवाद-रोधी अभियानों की प्रभावशीलता को ध्यान में रखते हुए अपने शेष सैन्य कर्मियों को स्वेच्छा से वापस बुलाया जा रहा है। वहीं, यूएई के विदेश मंत्रालय ने यमन में हथियार भेजने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
यूएई का कहना है कि मुकल्ला पहुंचे जहाज में हथियार नहीं, बल्कि वहां तैनात यूएई सैनिकों के उपयोग के लिए वाहन थे। मंत्रालय ने यह भी दोहराया कि यूएई यमन की संप्रभुता का सम्मान करता है और वैध सरकार की बहाली व आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई का समर्थन करता रहेगा।
यमन के भविष्य पर यमनी पक्षों का अधिकार: यूएई
यूएई पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि यमन की शासन व्यवस्था और क्षेत्रीय अखंडता का फैसला यमनी पक्षों को स्वयं करना चाहिए, न कि बाहरी शक्तियों को। मंगलवार को यूएई के फुजैरा बंदरगाह से रवाना हुआ एक जहाज यमन के मुकल्ला पहुंचा था, जिसके तुरंत बाद सऊदी अरब ने वहां हवाई हमला किया।
सऊदी अरब का आरोप है कि यह खेप अबू धाबी समर्थित सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) को हथियार देने के लिए भेजी गई थी।
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STC और यमनी सेना के बीच बढ़ता टकराव
अप्रैल 2017 से STC दक्षिणी यमन में अलग संप्रभुता की मांग कर रहा है। इसके विपरीत यमनी सेना हद्रामौत ट्राइबल एलायंस के साथ खड़ी है, जिसे सऊदी अरब का समर्थन प्राप्त है। हाल के हफ्तों में दोनों गुटों के बीच टकराव तेज हो गया है।
इस महीने की शुरुआत में STC ने हद्रामौत और महरा प्रांतों के बड़े हिस्सों पर नियंत्रण हासिल कर लिया, जिनमें तेल प्रतिष्ठान भी शामिल हैं। इसके बाद से क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है।
रणनीतिक क्षेत्र में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव
सऊदी अरब और यूएई यमन में अलग-अलग राजनीतिक और सैन्य गुटों का समर्थन कर रहे हैं। यह क्षेत्र वैश्विक शिपिंग मार्गों और मध्य पूर्व के प्रमुख ऊर्जा निर्यात क्षेत्रों के नजदीक स्थित होने के कारण रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जाता है।
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विश्लेषकों के अनुसार, हाल में किए गए सऊदी हवाई हमले अलगाववादी ताकतों को चेतावनी देने के लिए थे कि वे आगे बढ़ना रोकें और हद्रामौत व महरा से पीछे हटें। मौजूदा हालात में STC की स्थिति और मजबूत हुई है, जिससे भविष्य में यमन संकट पर होने वाली किसी भी बातचीत में उसका प्रभाव बढ़ सकता है।
