ग्रामीण खुले में शौच करने को मजबूर
श्रीदत्तगंज/बलरामपुर(राष्ट्र की परम्परा)
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय बनाए गए हैं, ताकि गांवों को खुले में शौच मुक्त कर ओडीएफ की श्रेणी में लाया जा सके। मगर देखरेख के अभाव में सामुदायिक शौचालयों की स्थिति बदहाल है। कहीं शौचालय में दरवाजा व सीट नहीं है तो कहीं जलापूर्ति के लिए पानी की टंकी नहीं है। अधिकांश गांवों में बने शौचालयों में ताले लटक रहे हैं। शौचालय का संचालन न होने से ग्रामीण खुले में शौच जाने को विवश हैं।
श्रीदत्तगंज के कपौवा शेरपुर में बना सामुदायिक शौचालय निष्प्रयोज्य पड़ा है। शौचालय के गेट पर ताला लगा होने के कारण उसका संचालन नहीं हो रहा है। ब्लॉक के कपौवा शेरपुर में बने शौचालय पर भी ताला लगा है। बिजली के अभाव में मोटर न चलने से टंकी में पानी नहीं भरता है। शौचालय गेट के पास गंदगी का अंबार लगा है।गांव के लवकुश, रामदीन,ननका,खेलावन ने बताया कि शौचालय बनाने से कोई लाभ ग्रामीणों को नही मिल रहा है ,खुले में शौच करने मजबूरी है।
गांवों में बने सामुदायिक शौचालयों के संचालन व देखरेख की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को दी गई है। प्रत्येक शौचालय पर हर महीने नौ हजार रुपये सरकार की तरफ से खर्च किया जा रहा है। इसमें छह हजार रुपये प्रतिमाह समूह की महिला को मानदेय व तीन हजार रुपये प्रति माह शौचालय की साफ-सफाई व अन्य चीजों के लिए खर्च होते हैं। हर महीने लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद जनता को इनका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। खण्ड विकास अधिकारी सुमति सिंह ने बताया कि जल्द ही शौचालय शुरू कराकर सम्बन्धित लोगो के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।
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