गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)l दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के लिए एक गौरवपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। विश्वविद्यालय के बी.टेक (इलेक्ट्रॉनिक्स शाखा) के तीन प्रतिभावान छात्रों प्रांजल पाण्डेय, रिशु गुप्ता और विकास यादव का चयन गोरखपुर स्थित उभरती हुई तकनीकी कंपनी रोबोटिक्स एरा प्राइवेट लिमिटेड में हुआ है।
इसमें प्रांजल पाण्डेय को सीनियर ऑपरेशंस मैनेजर, जबकि रिशु गुप्ता और विकास यादव को जूनियर एक्जीक्यूटिव इंजीनियर पद पर नियुक्त किया गया है। चयन के उपरांत तीनों छात्र कंपनी में कार्यभार ग्रहण कर चुके हैं और उत्तरदायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन कर रहे हैं।
रोबोटिक्स एरा प्राइवेट लिमिटेड, एक नवाचार-आधारित तकनीकी स्टार्टअप कंपनी है, जो रोबोटिक्स, एसटीईएम शिक्षा, इंटरनेट ऑफ थिंग्स तथा एम्बेडेड सिस्टम्स जैसे आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में सक्रिय रूप से कार्य कर रही है।
उल्लेखनीय है कि यह प्लेसमेंट 21 अप्रैल 2025 को विश्वविद्यालय के एम्प्लॉयमेंट ब्यूरो, गाइडेंस एंड प्लेसमेंट सेल द्वारा आयोजित प्लेसमेंट ड्राइव के माध्यम से सम्पन्न हुआ था। चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा, तकनीकी साक्षात्कार और व्यक्तिगत संवाद के विभिन्न चरण सम्मिलित थे, जिनमें इन विद्यार्थियों ने अपनी गहन तकनीकी समझ और विश्लेषण क्षमता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि “यह उपलब्धि न केवल हमारे विद्यार्थियों की प्रतिभा और परिश्रम का परिचायक है, बल्कि यह विश्वविद्यालय की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और उद्योगों से सशक्त जुड़ाव को भी दर्शाती है। मुझे गर्व है कि हमारे विद्यार्थी नवाचार के क्षेत्र में अपना स्थान बना रहे हैं। विश्वविद्यालय सदैव विद्यार्थियों को श्रेष्ठ अवसर और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।”
प्रो. अजय कुमार शुक्ल, निदेशक, एम्प्लॉयमेंट ब्यूरो, गाइडेंस एंड प्लेसमेंट सेल ने कहा कि “हमारा उद्देश्य केवल तकनीकी शिक्षा प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसा शैक्षणिक वातावरण विकसित करना है, जो विद्यार्थियों को औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप दक्ष बनाए। यह सफलता इस प्रयास का सकारात्मक परिणाम है।”
इस अवसर पर विश्वविद्यालय प्रशासन, इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग तथा संबंधित प्राध्यापकों ने तीनों छात्रों की इस उपलब्धि पर गौरव व्यक्त किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। यह सफलता न केवल छात्रों की व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह विश्वविद्यालय की शिक्षण पद्धति, नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता और तकनीकी क्षेत्र में बढ़ती साख का भी प्रमाण है।
-डॉ. सत्यवान सौरभ पोता प्यारा दादा जी का,बैठे उनके पास।दिनभर उनसे बातें करता,हँसता बारह मास।…
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