सलेमपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)। सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत प्रस्तावित मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय के निर्माण को लेकर सलेमपुर विकास क्षेत्र के ग्राम डुमवलिया स्थित मौजा किसन महूअवा में विवाद और गहरा गया है। विद्यालय निर्माण के लिए विभाग द्वारा आराजी संख्या 119/242 को चिन्हित किया गया है, जो राजस्व अभिलेखों में सरकारी भूमि के रूप में दर्ज बताई जा रही है।
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ग्रामीणों का आरोप है कि इसी भूमि के अंतर्गत कई आवासीय मकान वर्षों से बने हुए हैं। इन मकानों में रह रहे लोगों का दावा है कि उनके पास भूमि और मकान से जुड़े वैध दस्तावेज मौजूद हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है, इसके बावजूद प्रशासन द्वारा भूमि को विद्यालय निर्माण के लिए चिन्हित किया जाना उनके अधिकारों का हनन है।
मंगलवार को नायब तहसीलदार गोपाल जी के नेतृत्व में राजस्व विभाग की टीम पैमाइश और सीमांकन के लिए गांव पहुंची। करीब एक घंटे तक कार्य सामान्य रूप से चलता रहा, लेकिन इसके बाद गांव की दो महिलाओं ने आपत्ति जताते हुए पैमाइश कार्य रुकवा दिया। इस दौरान राजस्व कर्मियों और ग्रामीणों के बीच नोंकझोंक हो गई, जिससे मौके पर कुछ देर के लिए तनाव की स्थिति बन गई।
विवाद के बीच सेवा निवृत्त सैनिक प्रकाश यादव ने भी अपना पक्ष रखते हुए बताया कि उनका मकान लगभग 45 वर्षों से उक्त भूमि पर बना हुआ है। उन्होंने कहा कि उनके पास इससे संबंधित कागजात और न्यायालय की डिग्री भी है, इसके बावजूद भूमि को सरकारी बताकर विद्यालय के लिए उपयोग में लाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है।
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि जब तक न्यायालय का अंतिम निर्णय नहीं आ जाता, तब तक किसी भी प्रकार की पैमाइश या निर्माण कार्य नहीं किया जाना चाहिए। वहीं प्रशासन का कहना है कि राजस्व अभिलेखों के अनुसार यह भूमि सरकारी है और नियमानुसार प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
मौके पर मौजूद सीएनडीएस जल निगम गोरखपुर के अभियंता वेद प्रकाश सिंह ने बताया कि उनकी संस्था को केवल विद्यालय निर्माण का कार्य सौंपा गया है, जबकि भूमि से जुड़ा विवाद संबंधित विभाग के अधिकार क्षेत्र में आता है।
