जलपाईगुड़ी/पश्चिम बंगाल(राष्ट्र की परम्परा)
दिल से जुड़ी हर बात को बिखर जाने दिया,
खुद को संभाला, मगर उसे जाने दिया।
वो वादे, वो कसमें, वो बातें अधूरी,
हर याद को अब धुंध में खो जाने दिया।
तो फिर यूं हुआ मैंने उसे जाने दिया।।
चाहत के सफर में थे कांटे भी बहुत,
हर चोट को अब दर्द में बदल जाने दिया।
वो जो न समझा मेरे दिल की जुबां,
उसके हर सवाल को हवा में उड़ जाने दिया।
तो फिर यूं हुआ मैंने उसे जाने दिया।।
मोहब्बत की वो रातें, वो ख्वाब सुनहरे,
हर रंग को अब बेरंग हो जाने दिया।
सहर की तलाश में जो रातें गवाईं,
उन जख्मों को अब वक्त का मरहम पाने दिया।
तो फिर यूं हुआ मैंने उसे जाने दिया।।
आंखों के किनारे जो आंसू छुपे थे,
हर बूंद को अब समंदर में मिल जाने दिया।
आरज़ू जो कभी दिल का गहना रही,
उस ख्वाब को भी मैंने खाक हो जाने दिया।
तो फिर यूं हुआ मैंने उसे जाने दिया।।
मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के डीएवी इंटर कॉलेज में आयोजित टीईटी परीक्षा के दौरान…
मऊ (राष्ट्र की परंपरा)।भीषण गर्मी के बीच नगर पालिका परिषद मऊ की लापरवाही लोगों के…
दौसा (राष्ट्र की परम्परा)। राजस्थान के दौसा जिले में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर बुधवार तड़के एक…
महंगाई के बीच LPG उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। तेल विपणन कंपनियों ने…
काबुल/इस्लामाबाद (राष्ट्र की परम्परा)। पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान में कथित एयरस्ट्राइक किए जाने के बाद दोनों…
दिलीप कुमार अग्रवाल विवेक को बुद्धि, ज्ञान, प्रज्ञा, सूझबूझ अथवा समझदारी भी कहा जाता है।…