Categories: Newsbeat

संत कबीर की धरती पर ‘माया का प्रकोप’

भव्यता के पीछे का सच: मगहर महोत्सव में स्थानीय कलाकारों के साथ अन्याय

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। संत कबीर की निर्वास्थली मगहर में चल रहे कबीर मगहर महोत्सव को इस वर्ष पहले से अधिक भव्य स्वरूप देने के लिए सरकारी स्तर पर अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध कराए जाने की बात कही जा रही है, लेकिन इसी बीच स्थानीय कलाकारों के पारिश्रमिक में भारी कटौती का मामला सामने आना कई सवाल खड़े कर रहा है। प्रसिद्ध भजन गायक गोरखनाथ मिश्र ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से इस मुद्दे को सार्वजनिक करते हुए आयोजन समिति और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
श्री मिश्र के अनुसार वर्ष 2025 के कबीर मगहर महोत्सव में उन्होंने आयोजन समिति के आमंत्रण पर अपनी टीम के साथ प्रस्तुति दी थी। उस समय उन्हें अंगवस्त्र और प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया था और 20 हजार रुपए का पारिश्रमिक प्रदान किया गया था। यह सम्मान और पारिश्रमिक उनके लिए केवल आर्थिक नहीं, बल्कि कला के प्रति सम्मान का प्रतीक था।
लेकिन इस वर्ष 2026 में आयोजित हो रहे मगहर महोत्सव के लिए उन्हें पहले मात्र 2100 रुपए भुगतान की बात कही गई। बाद में यह राशि बढ़ाकर 5100 रुपए किए जाने की सूचना दी गई। श्री मिश्र के वायरल पोस्ट में दावा किया गया है कि उनकी टीम में म्यूजीशियन कलाकार और कई सहयोगी कलाकार शामिल रहते हैं, जिनका न्यूनतम पारिश्रमिक ही लगभग 12 हजार रुपए बैठता है। ऐसे में 5100 रुपए में कार्यक्रम करना न तो संभव है और न ही कलाकारों के आत्मसम्मान के अनुरूप।
उन्होंने अपने पोस्ट में बताया है कि इस विषय में जिलाधिकारी से बातचीत करने पर यह कहा गया कि धन की उपलब्धता सीमित है, इसलिए पूर्व वर्ष की तरह भुगतान संभव नहीं है। वहीं धनघटा और मेंहदावल क्षेत्र के विधायकों द्वारा उनका नाम कार्यक्रम में शामिल कराने के प्रयास भी किए गए। परंतु वे भी असफल रहे और आयोजन समिति की हठधर्मिता के चलते उन्हें महोत्सव में प्रस्तुति देने से वंचित होना पड़ रहा है।
यह मामला केवल एक कलाकार तक सीमित नहीं है, बल्कि मगहर महोत्सव जैसे प्रतिष्ठित सांस्कृतिक आयोजन में स्थानीय प्रतिभाओं के साथ हो रहे व्यवहार को उजागर करता है। सवाल यह है कि जब मंच भव्य बनाए जा रहे हैं, बाहरी आयोजनों पर खर्च हो रहा है, तो स्थानीय कलाकारों के मेहनताना में कटौती क्यों?
संत कबीरदास ने सदियों पहले चेताया था “माया महा ठगनी हम जानी”। आज उन्हीं संत कबीर की धरती पर यह पंक्ति फिर जीवंत होती दिख रही है, जहां भव्यता के आवरण में कलाकारों का श्रम, सम्मान और आत्मसम्मान ठगा जा रहा है। मगहर महोत्सव में उभरा यह विवाद संस्कृति के नाम पर हो रहे अन्याय की ओर इशारा करता है।

rkpNavneet Mishra

Recent Posts

रोहिन नदी में नहाने गए दो मासूम डूबे एक की मौत एक की तलाश जारी

एनडीआरएफ की टीम का सर्च ऑपरेशन जारी, गांव में पसरा मातम मौके पर पहुंचे जनप्रतिनिधि…

16 hours ago

मोहर्रम को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने पर जोर, पीस कमेटी की बैठक सम्पन्न

सिकंदरपुर /बलिया (राष्ट्र क़ी परम्परा ) आगामी मोहर्रम पर्व को शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में…

16 hours ago

डीडीयू के पीजी एवं व्यावसायिक पाठ्यक्रमों का परिणाम घोषित

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर द्वारा सत्र 2025-26 के विभिन्न स्नातकोत्तर…

16 hours ago

रिंग से लेकर समाज सेवा तक: डीडीयू के सनी सिंह बने खेल और सामाजिक बदलाव के नए यूथ आइकॉन

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। प्रतिभा, अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर दीनदयाल उपाध्याय…

17 hours ago

निंबस डिस्कवरी टूल से डिजिटल संसाधनों तक पहुँच पर बीबीएयू में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) के गौतम बुद्ध केंद्रीय पुस्तकालय द्वारा…

17 hours ago

राप्ती नदी में चार बच्चे डूबे तलाश में जुटी एनडीआरएफ

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)जिले के माधवपुर क्षेत्र में राप्ती नदी में नहाने गए चार बच्चों के…

18 hours ago