उतरौला/बलरामपुर(राष्ट्र की परम्परा)। सरकार द्वारा हरित प्रदेश बनाने का सपना केवल सपना बनकर रह गया है।लाखों की लागत के बाद भी नतीजा सिफर है ऐसा तब है जब सरकार प्रदेश को सुंदर बनाने के लिए धन खर्च कर रही है फिर भी जिम्मेदार लोगों की उपेक्षित नजरिया के चलते स्थिति बदतर है। उतरौला-बलरामपुर ,उतरौला-गोंडा मार्ग पर सड़क के दोनों किनारे लगभग 8माह पूर्व वृक्ष रोपित किया गया था।लेकिन रखरखाव के चलते रोपित पौधों का पता नही लग रहा है।यहां तक कि जिन स्थानों पर पेड़ रोपित किए गए वह स्थान पर गड्ढे भी समतल हो गए हैं।वृक्ष रोपण के साथ उनकी सुरक्षा के लिए टी गार्ड लगाना चाहिए था और उसमें पानी डालने तथा देखभाल के लिए किसी को जिम्मेदारी दी जानी थी।लेकिन किसी पौधों पर ऐसा नही हुआ।नतीजतन कुछ पौधों को छुट्टा मवेशियों ने अपना निवाला बना लिया तथा कुछ पानी के अभाव में सूख गए जितने भी पौध रोपित किए गए शायद ही कोई जीवित हो।कागजी खानापूर्ति गवाह तो बन गई लेकिन अपनी जमीनी हकीकत देखने से पता चलता है।जो सरकार के हरित प्रदेश एंव शुद्ध वातावरण बनाने के लिए संजोए गए कार्य धन खर्च के बाद भी महज सपने बनकर रह गए।
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