बलिया(राष्ट्र की परम्परा)l सिकंदरपुर क्षेत्र में इन दिनों पड़ रही कड़ाके की ठंड जनजीवन के लिए जानलेवा साबित हो रही है। ठंड का सबसे अधिक असर बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों पर देखने को मिल रहा है। सिकंदरपुर थाना क्षेत्र के भारथाव गांव में ठंड लगने से एक वृद्ध महिला की मौत हो गई, जिससे पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
भरथाव गांव निवासी 65 वर्षीय सुरमानी देवी पत्नी स्वर्गीय रंगनाथ पाठक पिछले कुछ समय से वृद्धावस्था से जुड़ी विभिन्न बीमारियों से ग्रसित थीं। शुक्रवार को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिजनों के अनुसार सुबह से ही उन्हें तेज ठंड के कारण अत्यधिक कंपकंपी और सांस लेने में परेशानी हो रही थी। जैसे-जैसे दिन चढ़ा, उनकी हालत और बिगड़ती चली गई। स्थिति गंभीर होते देख परिजन उन्हें तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिकंदरपुर लेकर पहुंचे। वहां चिकित्सकों ने प्राथमिक जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों का कहना है कि अत्यधिक ठंड के कारण बुजुर्गों में शरीर का तापमान तेजी से गिर जाता है, जिसे हाइपोथर्मिया कहा जाता है। यह स्थिति बेहद खतरनाक होती है और समय पर उपचार न मिलने पर जान का खतरा बढ़ जाता है। प्रारंभिक तौर पर सुरमानी देवी की मौत का कारण ठंड लगना माना जा रहा है।
घटना की सूचना मिलते ही भारथाव गांव में मातमी सन्नाटा पसर गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। सुरमानी देवी अपने सरल स्वभाव, धार्मिक प्रवृत्ति और मिलनसार व्यवहार के लिए जानी जाती थीं। गांव के लोग उन्हें श्रद्धा और सम्मान की दृष्टि से देखते थे। उनके निधन से न केवल परिवार बल्कि पूरे गांव को अपूरणीय क्षति पहुंची है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि बढ़ती ठंड को देखते हुए गरीब, असहाय और वृद्ध लोगों के लिए कंबल वितरण की व्यवस्था और तेज की जाए। साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर अलाव की संख्या बढ़ाई जाए, ताकि ठंड से बचाव हो सके। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते पर्याप्त इंतजाम किए जाते, तो शायद इस तरह की दुखद घटना को टाला जा सकता था।
वहीं स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि ठंड के मौसम में बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों का विशेष ध्यान रखें। उन्हें गर्म कपड़े पहनाएं, रात में ठंड से बचाव के पर्याप्त इंतजाम करें और किसी भी तरह की अस्वस्थता होने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।
यह घटना एक बार फिर यह चेतावनी देती है कि ठंड के बढ़ते प्रकोप को हल्के में लेना घातक हो सकता है। समय रहते सतर्कता और प्रशासनिक सहयोग ही ऐसी घटनाओं को रोक सकता
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