नकारात्मक एंगल (विस्तृत)
बलिया (राष्ट्र की परम्परा)
स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से जनता परेशान, गाँव-गाँव में झोलाछाप डॉक्टरों का बोलबाला
बलिया। जनपद की स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकांश प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) मरीजों के लिए राहत का माध्यम बनने के बजाय परेशानी का सबब साबित हो रहे हैं। ताजा स्थिति यह है कि कई उपकेंद्र महीनों से तालेबंद पड़े हैं। वहीं, पीएचसी पर डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की अनियमितता आम बात हो गई है। दवाओं की भारी कमी, जर्जर भवन और टूटी-फूटी मशीनें मरीजों की पीड़ा को और बढ़ा रही हैं। गाँवों में स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव का फायदा झोलाछाप डॉक्टर उठा रहे हैं। यह कथित “डॉक्टर” बिना डिग्री और प्रशिक्षण के मरीजों का इलाज कर रहे हैं, जिससे आए दिन गलत दवा और गलत ऑपरेशन के मामले सामने आ रहे हैं। हाल ही में सिकंदरपुर क्षेत्र की एक महिला ने आरोप लगाया था कि एक झोलाछाप डॉक्टर ने उसका गलत ऑपरेशन कर दिया, जिसके बाद उसे जिला अस्पताल तक भागना पड़ा। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता विनोद तिवारी ने कहा – “स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से लोग अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। अधिकारी केवल बैठकों और रिपोर्ट तक सीमित हैं। जनपद के आम नागरिकों ने मांग की है कि स्वास्थ्य विभाग को तत्काल कड़ा कदम उठाकर गाँव-गाँव में स्वास्थ्य सेवाओं को बहाल करना चाहिए, अन्यथा हालात और बिगड़ सकते हैं।
सकारात्मक एंगल (विस्तृत)
बलिया स्वास्थ्य विभाग ने सुधार की दिशा में उठाए ठोस कदम, ग्रामीणों को मिलने लगी राहत
बलिया। लंबे समय से आलोचना झेल रहे जिले के स्वास्थ्य विभाग ने अब सेवाओं को दुरुस्त करने के लिए कमर कस ली है। विभाग ने हाल ही में कई पहल की हैं, जिनका असर धीरे-धीरे जमीनी स्तर पर दिखने लगा है।
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर.के. सिंह ने बताया कि बलिया के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को चरणबद्ध तरीके से आवश्यक दवाओं और आधुनिक उपकरणों से लैस किया जा रहा है। 15 नए डॉक्टरों की तैनाती हाल ही में की गई है, जबकि नर्सिंग स्टाफ की कमी भी धीरे-धीरे दूर की जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में झोलाछाप डॉक्टरों पर अंकुश लगाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। अगस्त महीने में ही 12 से अधिक अवैध क्लिनिक और पैथोलॉजी लैब सील की जा चुकी हैं। साथ ही, गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए “विशेष स्वास्थ्य शिविर” आयोजित कर 2,500 से अधिक लाभार्थियों को उपचार और दवाएँ दी गईं।स्वास्थ्य विभाग ने मोबाइल हेल्थ यूनिट्स की शुरुआत भी की है, जो दूर-दराज़ गाँवों तक पहुँचकर मरीजों को प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करा रही हैं। स्थानीय निवासी सुरेश यादव ने खुशी जताते हुए कहा – “पहले हमें मामूली बुखार या जांच के लिए शहर भागना पड़ता था, लेकिन अब गाँव में ही इलाज और दवा मिल रही है। यह बदलाव सराहनीय है। जिला प्रशासन का दावा है कि अगले छह महीनों में बलिया की स्वास्थ्य सेवाओं को मॉडल के रूप में पूरे प्रदेश के सामने पेश किया जाएगा