Wednesday, January 28, 2026
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पिंक कार्ड अभियान से पूर्वांचल की महिलाओं को समय पर स्वास्थ्य संरक्षण मिलेगा: कुलपति प्रो. पूनम टंडन

डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय में महिलाओं के स्वास्थ्य संरक्षण की बड़ी पहल, 200 से अधिक महिलाओं का बना पिंक कार्ड

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में महिलाओं के स्वास्थ्य संरक्षण और जागरूकता को सशक्त बनाने की दिशा में “पिंक कार्ड अभियान” का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम महिला अध्ययन केंद्र, डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय, एम्स गोरखपुर तथा जिला स्वास्थ्य समिति के संयुक्त तत्वावधान में विश्वविद्यालय के GUWWA हॉल में संपन्न हुआ। अभियान के अंतर्गत महिला शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण, चिकित्सकीय परामर्श और स्वास्थ्य प्रोफाइल आधारित पिंक कार्ड तैयार किए गए।

कार्यक्रम की संरक्षक कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने अपने संदेश में कहा कि पिंक कार्ड अभियान महिलाओं को समय पर स्वास्थ्य संरक्षण उपलब्ध कराने की एक प्रभावी पहल है। नियमित स्वास्थ्य जांच से गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान संभव होती है, जिससे स्वस्थ महिला, स्वस्थ परिवार और सशक्त समाज का निर्माण होता है। विश्वविद्यालय महिला शिक्षकों और कर्मचारियों के स्वास्थ्य के प्रति पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है।

अभियान का उद्देश्य विश्वविद्यालय की समस्त महिला शिक्षकों और कर्मचारियों को एक ही मंच पर स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना रहा। इस दौरान 200 से अधिक महिलाओं के पिंक कार्ड बनाए गए, जिनमें उनके स्वास्थ्य से जुड़ी आवश्यक जानकारियां दर्ज की गईं।

स्वास्थ्य परीक्षण एम्स गोरखपुर के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. शिखा सेठ के नेतृत्व में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम द्वारा किया गया। डॉ. प्रीति प्रियदर्शी और उनकी टीम ने भी जांच और परामर्श में सक्रिय भूमिका निभाई। परीक्षण में गैर-संचारी रोगों की जांच, एनीमिया की जांच, स्तन परीक्षण, गर्भाशय ग्रीवा जांच और मौखिक स्वास्थ्य जांच शामिल रही।

कार्यक्रम में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. राजेश झा अपनी पूरी टीम के साथ मौजूद रहे। अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अरुण चौधरी और नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विनय पांडेय की गरिमामयी उपस्थिति रही। अधिकारियों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे जिले के लिए अनुकरणीय मॉडल बताया।

कार्यक्रम के संयोजन में प्रो. दिव्या रानी सिंह, विभागाध्यक्ष गृह विज्ञान एवं महिला अध्ययन केंद्र की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने कहा कि यह अभियान महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ नियमित जांच की संस्कृति को बढ़ावा देगा। परीक्षण के बाद सामने आया कि लगभग 25 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से ग्रसित थीं, जबकि 5 से 10 प्रतिशत महिलाओं में हाइपरटेंशन और मधुमेह की समस्या पाई गई। सीने में गांठ और दर्द जैसी समस्याओं का भी समाधान किया गया।

महिला आउटसोर्सिंग कर्मचारियों ने भी स्वास्थ्य परीक्षण कराया और जिला अस्पताल की ओर से उन्हें निःशुल्क दवाएं वितरित की गईं। इस अवसर पर बड़ी संख्या में महिला शिक्षक और कर्मचारी उपस्थित रहीं और उन्होंने अभियान को अत्यंत उपयोगी बताया।

प्रो. अनुभूति दूबे, प्रो. नंदिता सिंह, प्रो. सुषमा पांडेय, प्रो. सुनीता मुर्मू, प्रो. वीना बत्रा कुशवाहा, प्रो. सुधा यादव, प्रो. सुनीता दूबे सहित अनेक शिक्षकों और महिला कर्मचारियों ने पिंक कार्ड बनवाया। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. अनुपमा कौशिक, डॉ. नीता सिंह, डॉ. गार्गी पांडे, डॉ. गरिमा यादव और शोधार्थियों का योगदान रहा। अंत में आयोजकों ने चिकित्सकों, स्वास्थ्य विभाग की टीम और सहयोगी संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

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