ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से पहले बदला मजार कमेटी का रुख, अध्यक्ष ने माना अवैध कब्जा

एसडीएम सदर के समक्ष यू-टर्न, वर्षों से वैध बताई जा रही मजार अचानक कैसे हुई अवैध?

गौरव कुशवाहा

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)देवरिया के गोरखपुर रोड स्थित कुर्ना नाला के पास अब्दुल गनी शाह मजार प्रकरण में बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। ध्वस्तीकरण आदेश के बिल्कुल पहले मजार कमेटी का रुख अचानक बदल गया। रविवार को मजार कमेटी के अध्यक्ष मोहम्मद राशिद खान (निवासी भटनी दादन) ने एसडीएम सदर के समक्ष पेश होकर मजार परिसर में हुए अतिक्रमण को अवैध स्वीकार कर लिया और उसे स्वेच्छा से हटाने की पेशकश की।
यह घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है, जब एसडीएम सदर न्यायालय से ध्वस्तीकरण आदेश की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी और प्रशासनिक स्तर पर बुलडोजर कार्रवाई की तैयारी अंतिम चरण में थी। वर्षों तक जिस मजार को वैध, परंपरागत और धार्मिक आस्था से जुड़ा स्थल बताया जाता रहा, उसी को अचानक अवैध मान लेना कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

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सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि यह अतिक्रमण अवैध था तो वर्षों तक इसे वैध बताकर क्यों बचाया गया? और यदि यह वैध था, तो न्यायालय के आदेश से ठीक पहले मजार कमेटी को अपना रुख बदलने की आवश्यकता क्यों महसूस हुई? प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, जिस भूमि पर मजार और उससे जुड़े निर्माण मौजूद थे, वह पहले ही सार्वजनिक उपयोग की बंजर भूमि घोषित की जा चुकी थी। इसके बावजूद वहां दुकानों, निर्माण कार्यों और धार्मिक गतिविधियों का संचालन वर्षों तक होता रहा।
इस पूरे प्रकरण में यह भी सामने आया है कि राजस्व अभिलेखों को लेकर विवाद बना रहा और कार्रवाई से जुड़ी फाइलें समय-समय पर ठंडे बस्ते में जाती रहीं। अब जब अदालत के आदेश के बाद सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही थी, तभी मजार कमेटी अध्यक्ष द्वारा अवैध कब्जा स्वीकार करने का बयान सामने आया। प्रशासनिक हलकों में इसे संभावित दंडात्मक कार्रवाई से बचने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

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जानकारों का कहना है कि स्वेच्छा से अतिक्रमण हटाने की पेशकश का उद्देश्य यह दिखाना हो सकता है कि कब्जाधारी प्रशासन का सहयोग कर रहे हैं, जिससे उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई सीमित रह सके। हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कार्रवाई पूरी तरह न्यायालय के आदेश के अनुसार ही होगी और किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।
इस यू-टर्न ने न केवल मजार प्रकरण को और गंभीर बना दिया है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि वर्षों पुराने अवैध अतिक्रमण पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई और इसके लिए जिम्मेदार तंत्र पर जवाबदेही कब तय होगी।

Editor CP pandey

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