Monday, February 16, 2026
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लोकसभा में उठा यूपी की चिकित्सा अवसंरचना का मुद्दा

देवरिया सदर अस्पताल, बलिया मेडिकल कॉलेज और रिक्त पदों पर सरकार का जवाब

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। लोकसभा में उत्तर प्रदेश की चिकित्सा अवसंरचना को लेकर अतारांकित प्रश्न संख्या 2498 के माध्यम से सांसद रमाशंकर विद्यार्थी राजभर ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से विस्तृत जानकारी मांगी। 13 फरवरी 2026 को पूछे गए इस प्रश्न का उत्तर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने सदन में दिया।

प्रश्न में जिला अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता, डॉक्टरों एवं स्वास्थ्यकर्मियों के रिक्त पदों तथा देवरिया में सदर अस्पताल और बलिया मेडिकल कॉलेज की स्थिति से संबंधित जानकारी मांगी गई थी।


दवाओं और संसाधनों की उपलब्धता

मंत्री ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और अस्पताल राज्य विषय हैं। डॉक्टरों, नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ और उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करना संबंधित राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। हालांकि केंद्र सरकार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के माध्यम से वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करती है।

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार आवश्यक दवा सूची (EDL) के तहत उपलब्धता इस प्रकार है—

जिला अस्पताल: 394 स्वीकृत दवाओं के सापेक्ष 324 उपलब्ध
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC): 242 के सापेक्ष 214 उपलब्ध
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र/स्वास्थ्य एवं कल्याण पीएचसी: 195 के सापेक्ष 181 उपलब्ध
स्वास्थ्य एवं कल्याण उपकेंद्र: 84 के सापेक्ष 79 उपलब्ध

डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की स्थिति संबंधी विस्तृत जानकारी ‘हेल्थ डायनेमिक्स ऑफ इंडिया (इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड ह्यूमन रिसोर्सेज) 2022-23’ रिपोर्ट में उपलब्ध है।

देवरिया में सदर अस्पताल का प्रस्ताव

सरकार ने बताया कि अस्पतालों की स्थापना और उन्नयन राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। यदि राज्य सरकार प्रस्ताव भेजती है तो केंद्र सरकार कार्यक्रम कार्यान्वयन योजना (PIP) के आधार पर कार्यवाही के अभिलेख (ROP) के रूप में स्वीकृति प्रदान करती है।

देवरिया में नए सदर अस्पताल के संबंध में केंद्र स्तर पर पृथक स्वीकृति का उल्लेख नहीं किया गया।

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बलिया मेडिकल कॉलेज की स्थिति

बलिया में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज की प्रगति राज्य सरकार के स्तर पर जारी है। इसके पूर्ण संचालन की समय-सीमा भी राज्य सरकार द्वारा तय की जाएगी।

रिक्त पदों की स्थिति

उत्तर प्रदेश के जिला अस्पतालों में एलोपैथिक चिकित्सा अधिकारियों के कुल 3,123 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से 2,002 पद भरे हुए हैं।

देवरिया: 167 स्वीकृत पदों में 135 कार्यरत
बलिया: 277 स्वीकृत पदों में 190 कार्यरत

सरकार ने स्पष्ट किया कि रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया राज्य सरकार के स्तर पर संचालित होती है।

गुणवत्ता सुधार और पारदर्शिता

स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधार के लिए राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) लागू किया गया है। इसके तहत अस्पताल प्रबंधन, पारदर्शिता और शिकायत निवारण तंत्र को सुदृढ़ किया जा रहा है।

लोकसभा में उठे इस प्रश्न से उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में संसाधनों की उपलब्धता, रिक्त पदों और अवसंरचना विकास की स्थिति स्पष्ट हुई है। हालांकि कई महत्वपूर्ण निर्णय और उनके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी राज्य सरकार पर ही निर्भर है।

मीडिया प्रभारी जितेश कुमार वर्मा ने बताया कि इस प्रश्न के माध्यम से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े जमीनी मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता मिली है।

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