लक्ष्मीपुर रेंज का एकमा गेस्ट हाउस बना कूड़े का अड्डा, लाखों की लागत से बना मीटिंग हॉल भी जर्जर हाल में; ग्रामीणों ने उठाई जांच की मांग
रिपोर्ट: डॉ. सतीश पाण्डेय एवं नीरज की विशेष रिपोर्ट
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)उत्तर प्रदेश सरकार के स्वच्छ भारत मिशन का प्रभाव जहां पूरे प्रदेश में दिख रहा है, वहीं महराजगंज जनपद के लक्ष्मीपुर वन रेंज के एकमा गेस्ट हाउस परिसर में इसकी पूरी तरह अनदेखी नजर आ रही है।
यहां चारों ओर फैली गंदगी, खरपतवारों का जंगल और बदहाल परिसर विभाग की लापरवाही और फर्जी सफाई अभियानों की पोल खोल रहा है।
गेस्ट हाउस के ठीक सामने स्थित नव निर्मित मीटिंग हॉल भी जर्जर अवस्था में पड़ा है। लाखों रुपये की लागत से तैयार यह भवन अब कूड़े और झाड़ियों से घिरा हुआ है। परिसर की स्थिति देखकर साफ प्रतीत होता है कि वन विभाग का ध्यान स्वच्छता से अधिक फाइलों और बजट की सफाई पर है।
ग्रामीणों के गंभीर आरोप:
स्थानीय ग्रामीणों ने खुलासा किया कि हर वर्ष विभाग मजदूरों से सफाई कार्य कराने का दावा करता है, लेकिन यह काम केवल कागज़ों में ही सीमित रहता है।
कहा जाता है कि जंगल से जलावन लकड़ी लेने आने वाले ग्रामीणों से जबरन सफाई कराई जाती है, जबकि कागजों पर उसी काम का भुगतान मजदूरी के नाम पर दिखाया जाता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि यह सब रेंज के एसडीओ की जानकारी और संरक्षण में हो रहा है। उनके अनुसार, “ऊपर तक हिस्सा पहुंचने के कारण विभागीय लापरवाही पर किसी की नजर नहीं जाती।”
स्वच्छता मिशन को ठेंगा:
जब पूरा प्रदेश श्रमदान के माध्यम से स्वच्छता अभियान को नई दिशा देने में जुटा है, तब वन विभाग सफाई के लिए बजट का बहाना बनाकर अपने दायित्व से बचता दिख रहा है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि लक्ष्मीपुर रेंज के एसडीओ के कार्यकाल की जांच हो, ताकि बजट घोटाले और सफाई में लापरवाही के असली जिम्मेदार सामने आएं।
अधिकारियों की सफाई:
जब इस मामले में डीएफओ निरंजन सुर्वे से बात की गई तो उन्होंने कहा—
“शासन को सफाई कार्य हेतु प्रस्ताव भेजा जाएगा। धनराशि अवमुक्त होते ही गेस्ट हाउस और मीटिंग हॉल की सफाई कराई जाएगी।”
लेकिन सवाल अब भी वही है —
क्या विभाग के पास बजट से पहले ‘जिम्मेदारी’ नहीं है?
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