खेतों में दरारें, चारे-पानी की किल्लत, रोपाई रुकी, नहरें सूनी
बलिया जनपद के तटीय गांवों में गहराया संकट
बलिया (राष्ट्र की परम्परा)।
घाघरा नदी का पानी घटने से जहां कटान का खतरा थोड़ा कम हुआ है, वहीं तटवर्ती गांवों के किसानों के लिए यह स्थिति नई विपदा बनकर उभरी है। खेत सूख रहे हैं, धान की रोपाई समय पर नहीं हो पा रही, और नहरों में पानी नहीं छोड़े जाने से किसानों में आक्रोश और चिंता दोनों बढ़ गए हैं।
📍 संकटग्रस्त गांव:
दुहा विहरा, कठौड़ा, लीलकर, जमुई, सिसोटार, बसारिखपुर, शेखपुर, परसोत्तमपत्ति, बिजलीपुर, निपनियां समेत दर्जनों गांवों के खेतों में मोटी दरारें पड़ चुकी हैं। किसानों का कहना है कि अब ट्रैक्टर और बैलगाड़ी से भी खेत नहीं जोते जा रहे।
💧 पानी और चारे की दोहरी मार
गांवों के तालाब सूख गए हैं
हैंडपंपों का जलस्तर गिरा
महिलाओं को कई किलोमीटर तक पानी लाने जाना पड़ रहा
मवेशियों के लिए चारे की भारी किल्लत
🗣️ किसानों की पुकार
दुहा विहरा निवासी राजकुमार यादव ने कहा –
“अगर जल्द नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया, तो हम साल भर भूखे मरेंगे।”
⚠️ प्रशासन से मांग: तत्काल करें हस्तक्षेप
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि सिंचाई विभाग तुरंत नहरों में पानी छोड़े, अन्यथा क्षेत्र को सूखा घोषित करना पड़ेगा। अब तक विभाग की लापरवाही ने किसानों को भारी संकट में डाल दिया है।
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