जंगल से महज 200 मीटर दूरी पर चल रहा ईट उद्योग
अवैधानिक तरीके से वन विभाग द्वारा दिया गया है एनओसी
उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद संचालित ईट उद्योग
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा )। जिले के सोहगी बरवा वन्य जीव प्रभाग के पकड़ी रेंज एवं दक्षिणी चौक रेंज के समीप केवला पुर खुर्द, बेलवा काजी ,पिपरा, बागापार, कोदईपुर, विजयपुर,चैनपुर,बरवा राजा, बरई पट्टी, बेलभरिया , कम्हरिया पिपरिया गुरु गोविन्द , खोस्टा,सेखुई, बरगदवा , नदुआ, रेहाव , आदि गांवों मे दर्जनों ईट उद्योग स्थापित है जो उच्च न्यायालय के 12 दिसंबर 1996 गुण्डा वरमन वाले याचिका के क्रम में आदेश मे उच्च न्यायालय का आदेश था कि सेंचुरी वन्य जीव प्रभाग क्षेत्र के 10 किलो मीटर की दूरी तक कोई ईट उद्योग एव पोल्ट्री फार्म नही खोल सकता है जिससे वन्य जीव प्रभाग को नुकसान होता हो। फिर भी वन विभाग की मिली भगत से दर्जनों ईट उद्योग स्थापित हो गये हैं और अवैधानिक तरीके से वन विभाग एवं पर्यावरण विभाग में ईट उद्योग मालिकों द्वारा मोटी रकम देकर एनओसी भी हासिल कर लिया गया है ।जिससे वन संरक्षण तथा वन्य जीव पर खतरे का बादल मड़रा रहा है। केवला पुर खुर्द मे 3 ईट उद्योग,बेलवा काजी मे 2 ईट उद्योग, विजयपुर में 2 ईट उद्योग, चैनपुर में 1 ईट उद्योग,बरवा राजा बरई पट्टी में 2 ईट उद्योग,करौता में 1 ईट उद्योग,पिपरिया गुरुगोविन्द में 1 ईट उद्योग, खोस्टा में 1 ईट उद्योग रेहाव में 2 ईट उद्योग, बाकी जगहों पर एक एक ईट उद्योग स्थापित है जो 200 मीटर से लेकर 10 किलो मीटर के दायरा मे आता हैं ।जिससे सम्बन्धित विभाग की सांठगांठ से यह धन्धा संचालित हो रहा है। वन क्षेत्र से सटे ईट उद्योग के विषय पर भाजपा के सिसवा विधायक प्रेम सागर पटेल ने विधानसभा में मुद्दा उठाया था लेकिन इस पर कोई असर नहीं पड़ा
बताते चले कि ईट उद्योग मालिको को जंगल का किनारा इसलिए आकर्षित कर रहा है कि जंगल से लकड़ी आसानी से उपलब्ध हो जायेगी और ईट उद्योग संचालित करने में आसानी होगी।
इस मसले पर पर्यावरण संरक्षण ट्रस्ट के समाज सेवी दीपक चौहान ने कहा कि जंगल के किनारे उद्योग लगाने से पर्यावरण दूषित होगा तथा वन्य जीव पर खतरा बढ़ जायेगा ।सरकार को ठोस कदम उठाना चाहिए।
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