संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले में जारी कड़ाके की ठंड और शीतलहर ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। तापमान में लगातार गिरावट और ठंडी हवाओं के कारण आमजन का घर से निकलना मुश्किल हो गया है। सुबह-शाम सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा, जबकि मजबूरी में बाहर निकलने वाले लोग ठंड से बचने के लिए लकड़ी जलाकर अलाव तापते दिखे।
चौक-चौराहों, बस स्टैंड, बाजारों और ग्रामीण इलाकों में लोग खुद लकड़ी इकट्ठा कर अलाव जलाते नजर आए। ठंड का सबसे अधिक असर दिहाड़ी मजदूरों, रिक्शा चालकों, ठेला-पटरी व्यवसायियों और जरूरतमंदों पर पड़ रहा है। कई लोग खुले में रात गुजारने को मजबूर हैं।
घने कोहरे के कारण सुबह के समय दृश्यता कम रही, जिससे आवागमन प्रभावित हुआ। वाहन चालकों को परेशानी उठानी पड़ी, वहीं स्कूल जाने वाले बच्चों और बुजुर्गों को भी ठंड से जूझना पड़ा।
फसलों पर भी ठंड का असर: कड़ाके की ठंड और पाला पड़ने की आशंका से किसानों की चिंता बढ़ गई है। ठंड के चलते गेहूं, सरसों, मटर, आलू और सब्जी की फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना जताई जा रही है। किसानों का कहना है कि यदि तापमान इसी तरह गिरता रहा तो फसलों की बढ़वार रुक सकती है और उत्पादन पर असर पड़ेगा। कई किसान फसलों को बचाने के लिए सिंचाई और अन्य उपायों में जुटे हैं।
स्थानीय लोगों और किसानों ने प्रशासन से ठंड से बचाव के साथ-साथ किसानों के लिए भी जरूरी सलाह और सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। बढ़ती ठंड ने जनजीवन के साथ कृषि व्यवस्था पर भी गंभीर असर डालना शुरू कर दिया है।
कड़ाके की ठंड से जनजीवन ठप, फसलों पर भी संकट, अलाव के सहारे जूझते लोग
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