
दो वर्षों में रेबीज़ से किसी की मौत नहीं, जिले में एआरवी-आरआईजी का पर्याप्त स्टॉक
बलिया(राष्ट्र की परम्परा)
जिले में कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। आए दिन कुत्तों के हमलों से लोग घायल हो रहे हैं और सरकारी अस्पतालों में रोजाना 120 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें से करीब 90 प्रतिशत मामले केवल कुत्ता काटने के ही होते हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मौसम में बदलाव और प्रजनन काल के दौरान कुत्तों का स्वभाव आक्रामक हो जाता है, जिसके चलते काटने की घटनाएं बढ़ जाती हैं।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले दो वर्षों में जिले में रेबीज़ से एक भी मौत दर्ज नहीं हुई है। इसका मुख्य कारण है कि सभी सरकारी अस्पतालों में समय पर एंटी रेबीज़ वैक्सीन (एआरवी) और रेबीज़ इम्युनोग्लोबुलिन (आरआईजी) उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जनवरी से 31 जुलाई तक जिलेभर में 19,420 लोगों को एआरवी लगाई गई। वर्तमान में जिले के 32 सरकारी अस्पतालों, जिला अस्पताल, 20 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और 11 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में 2,365 से अधिक एआरवी वायल स्टॉक में मौजूद हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में शनिवार को 57 मरीज ऐसे पहुंचे, जिन्हें सामान्य जख्म पर एआरवी लगाया गया, जबकि 13 गंभीर मरीजों को आरआईजी की डोज दी गई। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, रोजाना 50 से 60 लोग केवल आरआईजी के लिए जिला अस्पताल आते हैं। इनमें बलिया जिले के अलावा गाजीपुर और बिहार के सीमावर्ती इलाकों से भी बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं।
चिकित्सकों का कहना है कि गहरे जख्म वाले मरीजों को केवल एक बार इंजेक्शन नहीं, बल्कि हर महीने दो से तीन डोज लगानी पड़ती है। समय पर और पूरी खुराक लेने से रेबीज़ का खतरा पूरी तरह टल जाता है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. संजीव वर्मन ने बताया कि जिले के सभी अस्पतालों में एआरवी और आरआईजी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। किसी भी मरीज को दवा की कमी नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि कुत्ते या किसी भी जानवर के काटने पर तुरंत प्रभावित जगह को साबुन-पानी से धोएं और विलंब किए बिना अस्पताल पहुंचें
