आक्रामक कुत्ते से दहशत, कई हमले और मौतों के बाद भी स्वामी पर कार्रवाई शून्य

आईजीआरएस शिकायत के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं? सिस्टम की खामियां उजागर

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)जनपद के बनकटा थाना क्षेत्र में एक पालतू लेकिन आक्रामक कुत्ते द्वारा लगातार मानव और पशुओं पर हमले की घटनाओं ने ग्रामीणों में भय का माहौल बना दिया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा समय-समय पर पशु नियंत्रण, जनसुरक्षा और जिम्मेदार स्वामित्व पर संज्ञान लेने के बावजूद, स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक निष्क्रियता सवालों के घेरे में है।
मामला बैदौली बुजुर्ग गांव का है, जहां बीते रविवार सुबह खेत की ओर जाते समय गांव निवासी रविभूषण द्विवेदी को गांव का पालतू कुत्ते ने काट लिया। ग्रामीणों के अनुसार यह कोई पहली घटना नहीं है। करीब एक वर्ष पूर्व इसी कुत्ते ने सेवानिवृत्त शिक्षक श्याम बिहारी दुबे को टहलते समय काटा था। इसके बाद कुछ महीनों के भीतर अरजानी अंसारी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई, जिसे ग्रामीण रेबिज संक्रमण से जोड़कर देख रहे हैं।

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ग्रामीणों का आरोप है कि उक्त कुत्ता बार-बार बकरियों के बच्चों को उठा ले जाता है, जिससे गरीब बकरी पालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इतना ही नहीं, राम बिहारी गोंड़ की गाय की मौत भी रेबिज से पीड़ित होने के बाद हुई, जिसका संबंध इसी कुत्ते के हमले से बताया जा रहा है। रेबिज एक घातक बीमारी है, जिसका समय पर इलाज न होने पर परिणाम जानलेवा हो सकता है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में अशिक्षा और जागरूकता की कमी के कारण लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते।
पीड़ितों और ग्रामीणों द्वारा आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई गई है और संबंधित थाने में लिखित तहरीर भी दी गई, बावजूद इसके अब तक न तो कुत्ते को अलग किया गया और न ही उसके स्वामी पर कोई ठोस कार्रवाई हुई। इससे ग्रामीणों में यह आशंका गहराती जा रही है कि प्रशासन किसी बड़ी वारदात का इंतजार कर रहा है।

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ग्रामीणों की मांग है कि आक्रामक कुत्ते को तत्काल नियंत्रित कर पशु चिकित्सकीय जांच कराई जाए, रेबिज की पुष्टि होने पर नियमानुसार कार्रवाई हो, और लापरवाह स्वामी के विरुद्ध कानूनी कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में किसी निर्दोष की जान न जाए और गांव में सुरक्षा बहाल हो सके।

Editor CP pandey

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