विकास, संविधान और नागरिक जीवन: दूषित पेयजल ने उजागर की भारत की बुनियादी सच्चाई
यदि 2047 तक भारत को सचमुच विकसित राष्ट्र बनना है, तो उसे बुनियादी सुविधाओं को नीतिगत प्राथमिकता नहीं बल्कि नैतिक दायित्व मानना होगा – एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया –…